
बोकारो जिला अंतर्गत पेटरवार थाना क्षेत्र के खेतको पंचायत निवासी खुर्शीद आलम के पुत्र तरबेज आलम उम्र 20 वर्ष महाराष्ट्र के पुणे में कार्यरत थे। रोज की तरह कार्य करने के लिए जा रहा था उसी दौरान सड़क हादसा में मौके पर हुई मौत। इसकी सूचना परिजन को दिया गया , सूचना मिलते ही परिजन रो रो कर बेहाल हुये। खेतको सदाम मुहल्ला में दुखद सूचना पाकर मातम छाया रहा। परिजन के जानकारी देते बताया तरबेज आलम अपने साथियों के साथ पुणे में टाईल्स मित्री का कार्य करता था सोमवार को सुबह काम करने के लिए अपने दो साथियो के साथ मोटरसाइकिल में जा रहा था इसी बीच एक चार पहिया वाहन जा टकराया , तरबेज आलम बाइक से सड़क के बीच मे गिर गया एक भारी वाहन से उसके ऊपर चढा दिया जहां तरबेज आलम को मौके पर मौत हो गयी। उनके साथ दो साथियो को किसी प्रकार कोई क्षति नही हुई दोनों साथियों सुरक्षित बच गये। मृतक तरबेज आलम के शव को पुणे से एंबुलेंस के माध्यम से सड़क मार्ग लाया गया। शव पहुंचते ही मोहल्ले में चिक पुकार मच गया।
इस्लामिक रीति रिवाज के अनुसार तबरेज आलम का शव को खेतको के कब्रिस्तान में बाद नमाजे ईशा को सुपर्द-ख़ाक कर दिया गया।
झारखंड में पलायन एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसका प्रभाव राज्य के आर्थिक विकास, जनशक्ति और सामाजिक परिवर्तन पर पड़ता है। यह समस्या विभिन्न कारणों से उत्पन्न होती है, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण हैं¹:
– *बेरोजगारी और आर्थिक संकट*: झारखंड में रोजगार के अवसरों की कमी और आर्थिक संकट के कारण लोग अन्य राज्यों में पलायन करने को मजबूर होते हैं।
– *शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी*: झारखंड में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी पलायन का एक प्रमुख कारण है।
– *उद्योग और विकास की कमी*: झारखंड में उद्योग और विकास की कमी के कारण भी लोग अन्य राज्यों में पलायन करते हैं।
पलायन के प्रभाव:
– *आर्थिक विकास पर प्रभाव*: पलायन के कारण झारखंड का आर्थिक विकास प्रभावित होता है, क्योंकि राज्य के युवा और शिक्षित लोग अन्य राज्यों में चले जाते हैं।
– *जनशक्ति पर प्रभाव*: पलायन के कारण झारखंड में जनशक्ति की कमी होती है, जो राज्य के विकास के लिए आवश्यक है।
– *सामाजिक परिवर्तन*: पलायन के कारण झारखंड में सामाजिक परिवर्तन भी होता है, जैसे कि परिवारों का विभाजन और सामाजिक संरचना में बदलाव।
उत्तरकाशी टनल हादसे जैसे घटनाएं झारखंड में पलायन की समस्या को उजागर करती हैं और राज्य सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है
