चतरा के टंडवा प्रखंड में बिना ग्रामसभा के प्रक्रिया पूरी करने का आरोप, जांच और कार्रवाई की मांग तेज
चतरा जिले के टंडवा प्रखंड अंतर्गत सिमरिया विधानसभा क्षेत्र में अमरपाली कोल परियोजना के तहत रेलवे साइडिंग निर्माण के लिए अनापत्ति (NOC) जारी करने में कथित फर्जीवाड़े का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे को सिमरिया के विधायक उज्जवल कुमार दास ने विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया, जिससे सरकार के जवाब पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार ने अपने उत्तर में दावा किया है कि संबंधित छह ग्रामों में ग्रामसभा नियमानुसार संपन्न हुई है।
हालांकि, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और दस्तावेजों के अनुसार वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है। संबंधित ग्राम पंचायत की मुखिया श्रीमती सरिता देवी द्वारा उपायुक्त को दिए गए लिखित आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ग्रामसभाएँ आयोजित नहीं हुईं और सेरनदाग की तरह फर्जी ग्रामसभा होने की आशंका जताई गई है। उपमुखिया, पंचायत समिति सदस्य एवं वार्ड सदस्यों ने भी अपने बयान में ग्रामसभा नहीं होने की पुष्टि की है। विधायक ने सदन में सवाल उठाया कि जब ग्राम सेरनदाग की ग्रामसभा उजागर होने के बाद निरस्त की गई, तो अन्य ग्रामों—विशेषकर पोकला उर्फ कसियाडीह—की ग्रामसभाओं की जांच और निरस्तीकरण क्यों नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने दिसंबर माह में पंचायत भवन में धरना देकर भी यह स्पष्ट किया था कि उनके यहाँ ग्रामसभा आयोजित नहीं हुई, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।वन अधिकार अधिनियम, 2006 के संदर्भ में भी सरकार के उत्तर पर प्रश्न उठे हैं। विधायक का कहना है कि जब ग्रामसभा ही आयोजित नहीं हुई, तो दावों की प्रक्रिया पूरी होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने इसे प्रशासन की गंभीर विफलता बताते हुए कहा कि इससे पात्र ग्रामीणों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित किया गया है। कार्रवाई के मुद्दे पर सरकार का रुख भी अस्पष्ट बताया जा रहा है। विधायक ने पूछा कि अब तक कितने दोषी पदाधिकारियों पर ठोस दंडात्मक कार्रवाई की गई है, इसका स्पष्ट विवरण क्यों नहीं दिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल औपचारिक जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है। विधायक उज्जवल कुमार दास ने पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने या संबंधित सभी ग्रामसभाओं के रजिस्टर को सदन के पटल पर प्रस्तुत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रशासनिक लापरवाही को संरक्षण देने के समान होगा और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।
