बोकारो/बेरमो: झारखंड की राजनीति में ‘बेरमो जिला’ का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राजस्व का पावरहाउस कहे जाने वाले इस क्षेत्र के लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सवाल उठता है कि जो क्षेत्र राज्य का खजाना भरता है, वह खुद बुनियादी प्रशासनिक सुविधाओं के लिए क्यों तरस रहा है?
सत्ता के गलियारों में क्या है हलचल? (मंत्री और विधायक का रुख)
बेरमो को जिला बनाने की मांग पर क्षेत्र के दिग्गज नेताओं की अपनी-अपनी दलीलें हैं:
बेरमो विधायक (कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह): विधायक अनूप सिंह इस मांग के सबसे मुखर समर्थक रहे हैं। उनका तर्क है कि बेरमो अनुमंडल की भौगोलिक संरचना इतनी जटिल है कि ऊपरघाट जैसे सुदूर इलाकों से जिला मुख्यालय बोकारो पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं। उन्होंने कई बार विधानसभा और मुख्यमंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाया है कि बेरमो में जिला बनने की 100% अर्हताएं मौजूद हैं।
राज्य सरकार/मंत्रियों का रुख: सरकार के मंत्रियों का कहना है कि नए जिलों के गठन के लिए प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों की आवश्यकता होती है। हालांकि, वे स्वीकार करते हैं कि बेरमो का राजस्व और जनसंख्या इसे एक मजबूत दावेदार बनाती है। सरकार के भीतर इस बात पर चर्चा तेज है कि चुनावी साल में जनता की इस ‘नब्ज’ को सहलाया जाए।
क्यों उठ रही है जिला बनाने की मांग? 5 बड़े कारण:
प्रशासनिक दूरी का दर्द: गोमिया प्रखंड के सुदूर इलाकों झुमरा पहाड़ , हुरलुग, चतरो चट्टी ,ऊपरघाट या नावाडीह के ग्रामीणों के लिए बोकारो जाना एक ‘यात्रा’ जैसा है। 80-110 किमी का सफर तय कर छोटे काम के लिए जाना समय और पैसे की बर्बादी है।
राजस्व का केंद्र, सुविधाओं में शून्य: CCL की ढोरी, बीएंडके और कथारा जैसे क्षेत्रों से सरकार को अरबों का राजस्व मिलता है, लेकिन बदले में यहाँ के लोगों को जिला स्तर के बड़े अस्पताल या कोर्ट के लिए भटकना पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली: गंभीर मरीजों को बोकारो या रांची रेफर करना मजबूरी बन गई है। बेरमो जिला बनता है, तो यहाँ एक अत्याधुनिक सदर अस्पताल का रास्ता साफ होगा।
कानून-व्यवस्था: घनी आबादी और कोयलांचल की संवेदनशीलता को देखते हुए, यहाँ एक स्वतंत्र पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।
विकास की सुस्त रफ्तार:एक अनुमंडल के पास सीमित फंड और शक्तियां होती हैं। जिला बनने से केंद्र और राज्य की योजनाओं का सीधा लाभ बेरमो को मिलेगा।
जनता की आवाज:स्थानीय निवासियों का स्पष्ट कहना है, “हमें सिर्फ कोयला निकालने की मशीन न समझा जाए। बेरमो की अपनी पहचान है और इसे जिला बनाना हमारा अधिकार है।”
निष्कर्ष:
बेरमो को जिला बनाना अब केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि यहाँ के लाखों लोगों का मान-सम्मान बन चुका है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस जनभावना को वोट की राजनीति से ऊपर उठकर कब धरातल पर उतारती है।
