तेनुघाट: बीएनएनसएस के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आपके मामलों का निष्पादन किस प्रकार किया जाता है इसकी पूरी जानकारी प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी दिग्विजय नाथ शुक्ला ने रविवार को तेनूघाट जेल में लगे जेल अदालत सह कानूनी जागरूकता शिविर में बंदियों को बताया। सबसे पहले श्री शुक्ला ने सभी को महाशिवरात्रि की बधाई दी। उसके बाद बताया कि प्रतिमाह जेल में जेल अदालत के साथ-साथ बंदियों को कानूनी जानकारियां भी दी जाती है। जिसमें बताया जाता है कि वह किस तरह अपराध से दूर रहे। कानूनी जागरूकता शिविर की अगुवाई कर रहे प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी श्री दिग्विजय नाथ शुक्ला ने बंदियों को बताया कि मुकदमे की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि किस तरह थाना में या न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया जाता है, उसके बाद क्या-क्या प्रक्रिया होती है उसकी पूरी जानकारी बंदियों को दी। वही अनुमंडलीय अस्पताल तेनुघाट के डॉक्टर शंभू कुमार ने बंदियों को अधिकार और कर्तव्य के बारे में जानकारियां दी और बताया कि आवेश में आकर कोई काम नहीं करना चाहिए इसी से हमें नुकसान होता है और हम अपराध कर किसी मामले में फंस जाते हैं। इसलिए हमें संयम से काम रहना चाहिए और हमेशा अपराध से दूर रहने की कोशिश करना चाहिए। पैनल अधिवक्ता प्रशांत पाल ने पैनल अधिवक्ता और पीएलवी आते हैं तो आप उनसे अपनी न्यायालय में चलने मुकदमा के बारे में जानकारी ले सकते हैं। सरकार के द्वारा हमेशा जेल प्रशासन को निर्देश दिया जाता है कि यहां पर रह रहे बंदी को सभी तरह की सुविधा मिलनी चाहिए और आपके सभी तरह के सुविधा प्रदान होती है। मंच संचालन और स्वागत भाषण कर रहे अधिवक्ता सुभाष कटरियार ने बंदियों को बताया कि यहां पर रह रहे बंदी या तो अपने किसी भाई बंधु के साथ झगड़ा कर या आवेश में आकर कोई घटना कर आते हैं। इसलिए आपको हमेशा अपने आप को संयम बनाना है और बाहर निकाल कर भी सभी को अपराध से दूर रहने के लिए कहना है। बंदियों ने भी अपने-अपने समस्या को बारे में बताया और समस्या के निराकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी दिग्विजय नाथ शुक्ला ने कई जानकारियां दी। धन्यवाद ज्ञापन कर रहे जेलर नीरज कुमार ने बताया कि प्रतिमाह जेल अदालत सह कानूनी जागरूकता शिविर के साथ-साथ मेडिकल कैंप भी लगाया जाता है। जिसमें सभी बंदी अपना इलाज करवाते हैं और स्वस्थ होते हैं। इस अवसर पर विजय कुमार, मदन प्रजापति सहित जेल कर्मी भी मौजूद थे।

