‘नई दिशा–एक नई पहल’ नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटी, वर्षों तक पारसनाथ व कोल्हान क्षेत्र में रही सक्रिय
गिरिडीह: गिरिडीह पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। भाकपा (माओवादी) की एरिया कमेटी सदस्य तथा 15 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली अनीता किस्कू उर्फ बबीता उर्फ बबीता कुमारी उर्फ बबीता देवी ने मंगलवार को झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति “नई दिशा–एक नई पहल” से प्रभावित होकर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी अभिनव आनंद तथा अपर पुलिस अधीक्षक सुजीत कुमार की उपस्थिति में आयोजित किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सली को सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ दिया जाएगा, ताकि वह हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य पारिवारिक जीवन व्यतीत कर सके। इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि सरकार की नीति का उद्देश्य भटके हुए युवाओं और नक्सली संगठन से जुड़े लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। 
वर्ष 2009 में जुड़ी थी नक्सली संगठन से पुलिस के अनुसार अनीता किस्कू वर्ष 2009 में नक्सली संगठन के संपर्क में आई थी। शुरुआत में वह सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से संगठन से जुड़ी और धीरे-धीरे उसकी सक्रिय सदस्य बन गई। बाद में उसकी नजदीकियां कुख्यात नक्सली अजय महतो उर्फ टाइगर से बढ़ीं और वर्ष 2017 में दोनों ने विवाह कर लिया। इसके बाद वह संगठन की गतिविधियों में लगातार सक्रिय रही पारसनाथ से कोल्हान तक रही सक्रिय पुलिस के अनुसार बबीता पारसनाथ, लुगू पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में संगठन की सक्रिय एरिया कमेटी सदस्य थी। संगठन में रहते हुए वह हथियार और विस्फोटक छिपाने, लेवी वसूली, ग्रामीणों में दहशत फैलाने तथा पुलिस और सुरक्षा बलों के खिलाफ नक्सली गतिविधियों में शामिल रही। संगठन में उसकी सक्रियता और कार्यशैली को देखते हुए उसे एरिया कमेटी सदस्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
संगठन से मोहभंग के बाद लिया आत्मसमर्पण का निर्णय पुलिस के अनुसार समय के साथ संगठन के भीतर शोषण, शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली और निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों से बबीता का मोहभंग हो गया। दूसरी ओर पुलिस के लगातार नक्सल विरोधी अभियान तथा उसके पति अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद उसका मनोबल टूट गया। इसके बाद वह पुलिस के संपर्क में आई और उसे आश्वस्त किया गया कि आत्मसमर्पण के बाद उसे किसी प्रकार की प्रताड़ना नहीं दी जाएगी तथा सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। परिवार से विचार-विमर्श करने के बाद उसने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया कई गंभीर मामलों में है नामजद बबीता के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में हत्या के प्रयास, पुलिस पर हमला, विस्फोटक अधिनियम, आर्म्स एक्ट, यूएपीए, सीएलए एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में लगभग 15 मामले दर्ज हैं। इनमें पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो तथा अन्य जिलों के कई थानों में दर्ज नक्सली घटनाएं शामिल हैं अन्य नक्सलियों के लिए भी बनेगी प्रेरणा गिरिडीह पुलिस ने उम्मीद जताई है कि बबीता के आत्मसमर्पण से अन्य नक्सली भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे। पुलिस ने बताया कि जिले में लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इससे पहले भी कई इनामी नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। पुलिस ने सभी नक्सलियों से अपील की है कि वे हथियार छोड़कर सरकार की “नई दिशा–एक नई पहल” पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और सामान्य जीवन की ओर लौटें।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
