परियोजना प्रबंधन के नियत व नीतियों में धांधली की आशंका, उच्चस्तरीय जांच में बड़ा खुलासा का दावा
चतरा: सीसीएल को हजारों करोड़ का शुद्ध मुनाफा देने वाली चतरा जिले के टंडवा में संचालित आम्रपाली कोल परियोजना इन दिनों परियोजना प्रबंधन के अदूरदर्शी नीति तकनीकी खामियों के कारण हजारों करोड़ का नुकसान उठा चुकी है। करोडों का नुकसान के पीछे कमीशन खोरी का बात कही जा रही है। जीएम द्वारा एक्सटेंशन का लाभ देने वाले तरकश से सारे तीर फेंक चुके हैं। जिससे पिछले एक माह से कोल उत्पादन व परिवहन पूरी तरह से ठप होने के कारण सरकारी राजस्व में हजारों करोड़ का नुकसान हो चुका है।काम के आभाव में स्थानीय कामगार अचानक बेरोजगार हो गये जिससे उनमें घोर आक्रोश है। विदित हो कि उत्खनन व परिवहन के लिये लगभग दस हजार करोड़ रुपए का नया टेंडर तकनीकी विवादों में फंस चुका है जो न्यायिक प्रक्रियाधीन है। वहीं पिछले लगभग तीन साल से परियोजना में जमे एक अधिकारी पर तीसरे फेज के खनन टेंडर का प्रपोजल तैयार करने में निजी लाभ लेने और पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर लेट- लतीफी तो नहीं की गई इसकी चर्चा चहुंओर छाई हुई है। जीएम के नियत और नीति पर संदेह व्यक्त की जा रही है। लोगों का मानना है कि तकनीकी त्रुटि के बाद मामला फंसने पर एक्सटेंशन का लाभ देने के एवज में भारी लाभार्जन किया गया है। जिसपर सक्षम प्राधिकार या केंद्रीय एजेंसियों से उच्चस्तरीय जांच की मांग रैयतों समेत अन्य लोगों ने किया है। अपने दावे के समर्थन में कहा कि आम्रपाली परियोजना बहुचर्चित रिश्वतखोरी और कमीशन खोरी जैसे मामलों में हमेशा घिरा रहा है। जीएम के कार्यकाल में हीं सीबीआई ने अवैध वसूली मामले में दो बार कार्रवाई कर के दो अधिकारी और सहयोग को रंगेहाथ दबोच चुकी है जो होने वाले धांधली के आशंकाओं को पुख्ता करते हैं। ज्वाइंट वेंचर का टेंडर खत्म होने के अंतिम क्षणों तक जानबूझकर विभागीय प्रक्रिया पूरी करने में विलंब किया गया। ज्वाइंट वेंचर कंपनी को एक्सटेंशन लाभ देने के लिए अपने तरकश से सारे तीर फेंक चुके हैं। चूंकि , मामला हजारों करोड़ रुपए के टेंडर से जुड़ा है जिससे ये हाईप्रोफाइल है। युक्त बातें सीसीएल के एक जानकार अधिकारी ने नाम नहीं छापने शर्त पर कही है। बताया जाता है कि संलिप्त सिंडिकेटों के तार बेहद हीं गहरे हैं। वैसे तमाम सवालों व शंकाओं से पर्दा उठाने का पाला सिर्फ केंद्र सरकार के पास है जो अपनी जांच एजेंसियों या निहित शक्तियों का इस्तेमाल कर दूध का दूध और पानी का पानी अलग कर सकती है। वही सीसीएल के जानकार बताते हैं कि इस पूरे मामले में सीबीआई जांच होती है तो बहुत बड़ा रहस्यम का पर्दा उठ सकता है और आम्रपाली में कोयला उत्पादन और डिस्पेच पूरी तरह से बंद होने का खेल सामने आ सकता है।
