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एक राष्ट्र-एक चुनाव से आर्थिक स्थिरता और विकास में वृद्धि होगी

राँची:-झारखंड प्रदेश अंतर्गत राजधानी राँची के नगरा टोली में वोमेन्स कॉलेज के साइंस ब्लॉक के नजदीक अवस्थित त्रिशूल डिफेंस अकादमी में “एक राष्ट्र-एक चुनाव” विषयक सेमिनार का आयोजन रविवार को किया गया।त्रिशूल डिफेंस एकेडमी एवं फैंस-फोरम फ़ॉर अवेयरनेस ऑफ नेशनल सिक्युरिटी झारखंड इकाई के संयुक्त तत्वाधान में आहूत ज्ञानवर्धक-विवेकपूर्ण चर्चा के दौरान मौजूद गणमान्यों ने अपने अपने विचार रखें। संबोधनों के दौरान वक्ताओं ने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव का मतलब है देश में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराना । इसका मतलब है कि लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे और मतदान भी एक साथ होगा।एक साथ चुनाव , जिसे लोकप्रिय रूप से एक राष्ट्र एक चुनाव के रूप में जाना जाता है , का अर्थ है पूरे देश में सभी राज्य विधानसभाओं, लोक सभा और स्थानीय निकायों (नगर पालिकाओं और पंचायतों) के लिए एक साथ चुनाव कराना।भारत में 1951-52 से 1967 तक राज्य विधानसभाओं और लोक सभा के लिए चुनाव एक साथ होते थे। यह चक्र टूट गया और वर्तमान में चुनाव हर वर्ष और कभी-कभी एक वर्ष के भीतर अलग-अलग समय पर होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारी सरकारी व्यय होता है, चुनावों में लगे सुरक्षा बलों और निर्वाचन अधिकारियों को लंबे समय तक अपने प्राथमिक कर्तव्यों से विमुख होना पड़ता है, आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है, आदि।इस प्रकार, भारत के विधि आयोग ने चुनाव कानूनों में सुधार पर अपनी 170वीं रिपोर्ट में कहा कि सरकार को ऐसी स्थिति पर विचार करना चाहिए जहां लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं, अर्थात एक राष्ट्र एक चुनाव।एक राष्ट्र एक चुनाव के तहत, पूरे देश में लोकसभा और सभी विधानसभाओं के लिए हर पांच साल में केवल एक बार चुनाव होंगे । एक साथ चुनाव कराने से मतदाताओं के लिए सुविधा और आसानी सुनिश्चित होती है, मतदाता थकान से बचते हैं, तथा मतदान प्रतिशत में वृद्धि होती है। एक राष्ट्र एक चुनाव से नीतियों में अधिक निश्चितता आएगी। बार-बार चुनाव होने से अनिश्चितता का माहौल बनता है और इससे नीतिगत निर्णय प्रभावित हो सकते हैं।चुनावों के एक साथ होने से आर्थिक स्थिरता और विकास में वृद्धि होगी, जिससे व्यवसाय प्रतिकूल नीतिगत परिवर्तनों के भय के बिना निर्णय लेने में सक्षम होंगे। जब सरकार के तीनों स्तरों पर एक साथ चुनाव कराए जाएंगे, तो इससे उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला चक्र में व्यवधान से बचा जा सकेगा, क्योंकि इससे प्रवासी श्रमिकों को वोट डालने के लिए छुट्टी लेने से रोका जा सकेगा। एक राष्ट्र एक चुनाव नीतिगत निष्क्रियता को रोकता है और शासन पर ध्यान केंद्रित बढ़ाता है।एक साथ चुनाव कराने से सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ कम होगा, क्योंकि इससे बीच-बीच में होने वाले चुनावों पर होने वाले व्यय का दोहराव नहीं होगा। एक राष्ट्र एक चुनाव के कार्यान्वयन से दुर्लभ संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग, पूंजी निवेश में वृद्धि और परिसंपत्ति सृजन होगा। एक राष्ट्र एक चुनाव चुनावी कैलेंडर को समन्वित करता है, जिससे शासन के लिए अधिक समय की उपलब्धता सुनिश्चित होगी तथा नागरिकों को निर्बाध सार्वजनिक सेवा प्रदान की जा सकेगी। एक राष्ट्र एक चुनाव से चुनाव संबंधी विवाद और अपराध कम होंगे, जिससे अदालतों पर बोझ कम होगा। एक राष्ट्र एक चुनाव से प्रयासों का दोहराव टाला जा सकेगा तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों और सुरक्षा बलों का समय और ऊर्जा बचेगी। एक राष्ट्र एक चुनाव से चुनावों के दौरान अक्सर होने वाली सामाजिक असामंजस्यता और संघर्ष में कमी आएगी, क्योंकि चुनाव हर पांच साल में एक बार होते हैं।इस अवसर पर भारत सरकार के रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ, ब्रिगेडियर अमर नारायण, पूर्व कुलपति अंजनी श्रीवास्तव, सुबोध ग्रंथमाला के पार्टनर विशाल शर्मा,त्रिशूल डिफेंस एकेडमी के अमित सोनी,निशा भगत, सुष्मिता सहित भारी संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी थी।*

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