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झारखंड में फिल्म उद्योग को नई पहचान दिलाने की पूरी संभावना: असीम सिन्हा

झारखंड में फिल्म उद्योग को नई पहचान दिलाने की पूरी संभावना: असीम सिन्हा

“मीट द मेंटर” कार्यक्रम में शामिल हए मशहूर फिल्म एडीटर असीम सिन्हा

 

रांची: झारखंड में इस बात की पूरी संभावना है कि यहां का स्थानीय सिनेमा ग्लोबल स्तर अपनी पहचान बनाए। इसके लिए जरूरी है कि शहरों से लेकर गांवों तक में सिनेमा के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार किया जाए। मशहूर फिल्म एडिटर और फिल्मकार असीम सिन्हा आज सूचना भवन के सभागार में झारखंड फिल्म विकास निगम लिमिटेड (जेएफडीसीएल) द्वारा आयोजित “मीट द मेंटर” कार्यक्रम में बोल रहे थे।

श्री सिन्हा ने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में फिल्मों का विकास करने के लिए वित्तीय सहायता से अधिक सिनेमा के इंफ्रास्ट्रक्चर औऱ ग्रामीण क्षेत्रों में सिनेमा कल्चर को बढ़ावा देने की जरूरत है।

उन्होंने क्षेत्रीय कलाकारों को अवसर देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि फिल्मों के लिए सीड फंडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि स्थानीय फिल्मों को बढ़ावा मिल सके। साथ ही फिल्म और स्क्रिप्ट के मूल्यांकन की मजबूत प्रणाली विकसित करने हेतु मेंटरिंग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के प्रयासों को और गति देने की आवश्यकता है, ताकि यहां का फिल्म उद्योग दक्षिण भारतीय राज्यों या अन्य किसी भी राज्य के फिल्म उद्योग की तरह विकसित हो सके।

श्री सिन्हा ने स्थानीय भाषा, कला और प्रतिभाओं को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे झारखंड की फिल्मों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सकती है। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों और फिल्म एडिटिंग में आए तकनीकी बदलावों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती और वे आज भी सीखने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने प्रसिद्ध फिल्मकार श्याम बेनेगल, अंशुल शर्मा, चंद्र प्रकाश द्विदी, पाकिस्तानी निर्देशक महरीन जब्बार, तिगमांशु धूलिया, कल्पना लाजमी, केतन मेहता, कुंदन शाह सरीखे फिल्मकारों के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए।

असीम सिन्हा वर्तमान में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के नन फीचर फिल्म श्रेणी की जूरी के अध्यक्ष हैं।

 

 

इस अवसर पर विभाग के उपनिदेशक सैय्यद राशिद अख्तर ने उन्हें शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक श्री आनंद ने असीम सिन्हा के फिल्मी सफर पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में संपादन का कार्य किया है और लगभग 30 वर्षों तक इस क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि असीम सिन्हा का अनुभव और योगदान झारखंड के उभरते फिल्म उद्योग के लिए प्रेरणास्रोत है।

अपने संबोधन में असीम सिन्हा ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से उनकी इच्छा थी कि झारखंड में एक फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना हो, जो अब साकार होती दिख रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने रांची में पढ़ाई करने के बाद मुंबई का रुख किया और वहां सैकड़ों फिल्मों के संपादन का अनुभव प्राप्त किया।

कार्यक्रम में सहायक निदेशक श्री अभय कुमार, जेब अख्तर, अनुज कुमार, महेश माझी सहित फिल्मों से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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