रांची: अपनी जमीन और हक की लड़ाई लड़ रहे विस्थापितों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। विस्थापित एवं स्थानीय समन्वय समिति के बैनर तले 9 अप्रैल से राजभवन के समक्ष शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना आज सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी 13 सूत्री मांगों पर मुहर नहीं लगती, वे पीछे नहीं हटेंगे।
आंदोलन का नेतृत्व और मुख्य चेहरा
आज के धरने की अध्यक्षता समिति के केंद्रीय सचिव और झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के मुख्य संयोजक महमूद आलम ने की। वहीं, पूरे आंदोलन का संचालन केंद्रीय अध्यक्ष दिनेश्वर मंडल के नेतृत्व में किया जा रहा है।
धरना स्थल पर प्रमुख उपस्थिति:
- रजी अहमद (झारखंड आंदोलनकारी)
- सुशील कुमार महतो
- नुनु गोपाल, कैलाश महतो
- एहसान फरीदी, तनवीर आलम, मुर्मू
क्या हैं प्रमुख मांगें?
समिति के नेताओं के अनुसार, यह लड़ाई दामोदर घाटी निगम (DVC) के ‘ऑल वैली’ क्षेत्र के उन विस्थापितों की है जिन्होंने अपनी जमीन तो दे दी, लेकिन बदले में उन्हें केवल उपेक्षा मिली। उनकी 13 सूत्री मांगों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- रोजगार और उचित मुआवजा
- जमीन का मालिकाना हक
- मुफ्त बिजली और पानी की सुविधा
- आवास, पेंशन और बीमा योजनाएं
- बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं
“यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में है। DVC और सरकार को अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना होगा। विस्थापितों के त्याग का मजाक नहीं उड़ाया जा सकता। जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, हम यहां से नहीं हिलेंगे।”
— महमूद आलम, मुख्य संयोजक
बड़ी चेतावनी: आंदोलन होगा और भी उग्र
समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार और DVC प्रबंधन जल्द ही वार्ता की मेज पर नहीं आते और मांगों को पूरा नहीं करते, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और भी व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। विस्थापितों के चेहरे पर आक्रोश साफ झलक रहा है, जो अब अपने अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
रिपोर्ट: रांची ब्यूरो
दिनांक: 16 अप्रैल, 2026
