तेनुघाट: बोकारो जिला ग्राम सभा मंच के द्वारा तेनुघाट में वन अधिकार कानून 2006 नियम 2008 के संशोधन नियम 2012 के तहत 2016 से 23 तक का लंबित दावों बेरमो अनुमंडल को पार 150 सामुदायिक दावा एवं हजारों व्यक्तिगत को निष्पादक कर समुदय वन पट्टा निर्गत करने के संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी सह अध्यक्ष अनुमंडल स्तरीय वनाधिकार समिति बेरमो अनुमंडल तेनुघाट को ज्ञापन सौंपा । 
इससे पूर्व अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरनाप्रदर्शन में वक्ताओं के द्वारा बताया गया कि बोकारो जिला में वनधिकार कानून 2006 नियम 2008 एवं संशोधित नियम 2012 को समुचित एवं विधि सम्मत तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है । जिले में सैकड़ो व्यक्तिगत और करीब 200 सामुदायिक वनाधिकार दावे अनुमंडल या जिला स्तर पर लंबित पड़े है । अब तक जो व्यक्तिगत और सामुदायिक वनाधिकार प्रमाण पत्र (पट्टे) दिए गए, वह भी गलत या आधे अधूरे हैं, वनाधिकार कानून के प्रावधानों और नियम के अनुरूप विधिसम्मत नहीं है और निर्दिष्ट मानक प्रारूप में नहीं है । वनाधिकार मामले में वन विभाग द्वारा मनमानी और दावेदारों के दावित रकवा में कटौती की जा रही है । वनाधिकार दावो को रद्द या निरस्त करने पर दावेदारों या ग्राम सभा एवं वनाधिकार समिति को लिखित सूचना देनी है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है । सामुदायिक वनाधिकार पट्टा हल जुवाट जैसे कृषि औजार के लिए लकड़ी लाने का अधिकार नहीं दिया जा रहा है । धारा 3.1 (झ) के तहत ग्राम सभा को जंगलों के संरक्षण और प्रबंधन का अधिकार है लेकिन उसे भी नहीं दिया जा रहा है । इस तरह से वनाधिकार कानून का कई तरह से उल्लंघन किया जा रहा है ।
जिले के कई वन क्षेत्र में वन विभाग द्वारा वनाश्रित आदिवासियों एव परंपरागत वन निवासियों पर शोषण, अत्याचार एवं दमन भी किया जा रहा है । जिले में वनाश्रीतो, वनाधिकार कार्यकर्ताओं, वनाधिकार कानून को लागू करने में अगुवाई करने और ग्राम सभा को सहयोग करने वालों तथा वनाधिकार समितियां एवं सभाओं के प्रतिनिधियों पर वन विभाग द्वारा झूठे मुकदमे किए जा रहे हैं जैसे गोमिया प्रखंड में वनचतरा, डंडरा, जुरकुंडा, और चित्तू में ऐसा हुआ है । इस तरह से वनाश्रितो एवं आदिवासियों पर प्रताड़ना जारी है तथा वनाश्रित एवं वनाधिकार के संघर्ष में की आवाज दबाने की कोशिश है । जबकि भारत सरकार का अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 वनाश्रित आदिवासियों और जंगल वासियों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए बना है ।
उपरोक्त सभी मामलों को लेकर बोकारो जिला ग्राम सभा मंच की ओर से तेनुघाट स्थित बेरमो अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया गया तथा मंच के प्रतिनिधिमंडल द्वारा अनुमंडल स्तरीय वन अधिकार समिति के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा गया जिसमें निम्नलिखित मांगे हैं—-
1) वन अधिकार कानून 2006 को पूरे बोकारो जिले में समुचित एवं विधि सम्मत तरीके से लागू किया जाए। झारखंड सरकार के अबुआ वीर अबुआ दिशोम वनाधिकार अभियान को धरातल में लागू करने हेतु संबंधित सभी विभागीय अधिकारीयो एवं कर्मचारियों और सभी ग्राम सभा अध्यक्ष सचिव स्तर के पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी एवं भागीदारी निश्चित की जाए ।
2) जिले में वनाधिकार के तहत सभी लंबित व्यक्तिगत एव सामुदायिक वनाधिकार दावे को जल्द से जल्द निपटारा कर समुचित/विधि सम्मत तरीके से निर्दिष्ट मानक प्रारूप में वनाधिकार प्रमाण पत्र निर्गत करने का काम सुनिश्चित किया जाए ।
3) वनाधिकार कानून के उल्लंघन करने वाले सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों और जन प्रतिनिधियों पर धारा 7 और अनुसूचित जाति और जनजाती अत्याचार निवारण संशोधन अधिनियम 2015 धारा 3(1) (छ) एवं नियम 2016 के तहत कार्यवाही की जाए और वनाधिकार कानून के उल्लंघन, दुरुपयोग, तोड़ मरोड या निष्प्रभावी करने पर रोक लगाई जाए ।
4) वनाधिकार को लागू करने में जमीनी स्तर पर सक्रिय वनाधिकार कार्यकर्ताओं एवं नेतृत्वकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वनाधिकार समिति और ग्राम सभा के प्रतिनिधियों या अगुवाई करने वालों पर वन विभाग यह स्थानीय प्रशासन और बिचौलियों के शोषण, उत्पीड़न, अत्याचार एवं दमन पर रोक या बंद करने हेतु ठोस एवं प्रभावी पहल कदमी सुनिश्चित की जाए ।
5) वनाश्रितो / वनाधिकार कार्यकर्ताओं पर किए गए झूठे केस मुकदमे को रद्द या वापस करने की पहल की जाए
6) बोकारो जिला ग्राम सभा मंच के साथ में विभाग समन्वय स्थापित कर वन पट्टा निर्गत करने की सुनिश्चित किया जाए ।
उक्त ज्ञापन की प्रतिलिपि उपायुक्त सह अध्यक्ष जिला स्तरीय वनाधिकार समिति और जनजातीय कल्याण आयुक्त, झारखंड सरकार को भी भेजे गए।
जहां गोमिया विधायक डॉक्टर लंबोदर महतो, चितरंजन साव सहित कई गण्यमन लोग भी पहुंचे और अपना समर्थन दिया । वहीं बोकारो जिला ग्राम सभा मंच के प्रतिनिधि मोतीलाल बेसरा, बाबूलाल मरांडी, रतिराम किसको, राजेश कुमार महतो, राजेश कुमार हांसदा सहित कई अन्य लोगों ने भी संबोधित किया । वहीं हजारों की संख्या में महिला पुरूष मौजूद थे ।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
