जांच पूरी, पर अंतिम आदेश का इंतजार; ड्यूटी बहाली व लंबित मानदेय की मांग
चतरा (इटखोरी) इटखोरी प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र रजवार संख्या-06 की सहायिका लीला सिन्हा एक बार फिर जिला मुख्यालय स्थित जनता दरबार पहुंचीं। सेवा अभिलेखों की जांच पूरी होने के बाद भी अंतिम निर्णय नहीं होने पर उन्होंने शीघ्र न्याय की गुहार लगाई। उपायुक्त को दिए आवेदन में लीला सिन्हा ने कहा कि वह वर्ष 1998 से सहायिका के पद पर कार्यरत हैं। नियुक्ति के समय शैक्षणिक प्रमाण-पत्र के आधार पर जन्मतिथि दर्ज कर सेवा स्वीकार की गई थी। उनका कहना है कि यदि दस्तावेजों में अंतर है तो मूल सेवा अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष परीक्षण कर निर्णय लिया जाए। कुछ सप्ताह पूर्व उपायुक्त रवि आनंद ने कहा था कि मामला संज्ञान में है और जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं। जांच प्रतिवेदन मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की बात कही थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इटखोरी बीडीओ ने दस्तावेजों की जांच कर प्रतिवेदन जिला मुख्यालय भेज दिया है। पीड़िता का कहना है कि जांच के बाद वह नियमित रूप से केंद्र में कार्य कर रही हैं, लेकिन अभी तक अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। लीला सिन्हा ने कहा कि वह नियमित सेवाएं दे रही हैं, फिर भी उपस्थिति दर्ज नहीं हो रही और लंबित मानदेय का भुगतान भी शेष है। इस संबंध में अभी तक कोई स्पष्ट लिखित आदेश नहीं मिला है। शुक्रवार को जनता दरबार में उन्होंने कहा कि यदि मैं पात्र नहीं हूं तो लिखित आदेश दें। यदि दस्तावेज सही हैं तो ड्यूटी नियमित कर लंबित मानदेय का भुगतान किया जाए। लीला सिन्हा ने कहा कि लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने से वह मानसिक, सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद वह न्याय की उम्मीद में प्रशासन के समक्ष अपनी बात रख रही हैं। लगातार खबरों, जांच और दो बार जनता दरबार में आवेदन के बाद अब जिला प्रशासन के अंतिम निर्णय का इंतजार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समयबद्ध और पारदर्शी निर्णय से प्रशासनिक प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास मजबूत होगा।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
