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एसएसभीएम आचार्य वीरेंद्र मिश्रा को दी गई भावभीनी विदाई।

रिटायर्ड हुआ हूं, टायर्ड नहीं : वीरेंद्र मिश्रा 

पतरातू: पतरातू थर्मल स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सभा का आयोजन कर आचार्य वीरेंद्र मिश्रा को उनके सेवानिवृत्त होने पर भावभीनी विदाई दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य वीरेंद्र मिश्रा एवं प्राचार्य सुरेंद्र कुमार पाठक के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। मंच संचालन अशोक कुमार सिंह के द्वारा किया गया। बहन श्रेया झा, श्रेया कुमारी, नैंसी कुमारी, सिया कुमारी एवं अंजली कुमारी ने विदाई गीत गाते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। मौके पर आचार्य उदय मिश्रा ने कहा कि वीरेंद्र मिश्रा को बच्चों से बहुत लगाव था। उन्होंने कहा कि उनके अपने विषयों पर काफी पकड़ थी एवं वे एक अच्छे आचार्य होने के साथ साथ अच्छे चित्रकार भी थे। वे कब चॉक उठाते और कब चित्र बन जाता पता ही नहीं चलता। उन्होंने आचार्य को जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत करने के लिए शुभकामनाएं दी। आचार्या सुमन सिन्हा ने कहा कि वीरेंद्र मिश्रा सदैव बच्चों के प्रिय रहे हैं। बात चित्रकारी की हो या फिर बांसुरी बजाने की उनका कोई जोड़ नहीं है। उनकी लिखावट का बच्चे ही नहीं बल्कि सभी आचार्य भी कायल थे। उन्होंने कहा कि वे मस्तमौला अंदाज के व्यक्ति थे जो विषम परिस्थितियों में भी मुस्कुराते रहते थे। आचार्य वीरेंद्र मिश्रा ने कहा कि उन्होंने 12 दिसम्बर 1990 को विद्यालय में अपना योगदान दिया और तब से वे अपना पूरा जीवन विद्यालय के उत्थान में लगा दिए। वे हिंदी और संस्कृत के शिक्षक रहे हैं और विद्यार्थी जीवन में उन्हें कई बार स्कॉलरशिप भी मिली हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के एक रोचक प्रसंग के बारे में बच्चों को बताते हुए कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा खुशी तब हुई जब उनका पढ़ाया हुआ छात्र संस्कृति ज्ञान की प्रतियोगिता में विद्यालय, संकुल, विभाग, प्रांत और क्षेत्र होते हुए अखिल भारतीय स्तर तक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वे अपने पूरे कार्यकाल में घोष के भी आचार्य रहे और कई पीढ़ियों तक बच्चों को घोष सीखते रहे। वे अपने कार्यकाल के दौरान पांच वर्षों तक एसएसभीएम रोहचाप में प्रधानाचार्य के रूप में भी अपना योगदान दिए। प्राचार्य सुरेंद्र कुमार पाठक ने उनके कार्यकाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे ऐसे आचार्य रहे जिन्होंने नाम मात्र का अवकाश लिया। उनका पूरा जीवन विद्यालय के लिए समर्पित रहा। सचिव सूरज प्रसाद ने कहा कि उनकी विदाई विद्यालय के लिए अपूर्णीय क्षति है, परंतु इस पल से सभी को गुजरना पड़ता है। विद्यालय परिवार सदैव उनको स्मरण करेगा। कार्यक्रम के अंत में सभी सचिव, प्रधानाचार्य,आचार्यों एवं भैया बहनों ने विदाई भेंट एवं शुभकामना के साथ विदाई दी

 

गुलाम सरवर की खास रिपोर्ट,

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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