सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बरगंडा, गिरिडीह में शुक्रवार को जिला सप्तशती संगम एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि शालिनी बैशिख्यार, प्रांत संयोजिका रंजना सिंह, सह संयोजिका किरण राय, जिला संयोजिका स्वाति सिन्हा, विभाग प्रमुख ब्रजेश सिंह एवं प्रधानाचार्य आनंद कमल ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस दौरान मंच संचालन शालिनी राज ने तथा अतिथि परिचय निशा श्रेष्ठ आभार सुजाता प्रसाद ने किया । इस मौके पर बानो द्वारा हम ही मात्र शक्ति हैं मधुर गीत प्रस्तुत किया गया। इस दौरान कार्यशाला में उपस्थित मातृशक्ति के बीच प्रश्नोत्तरी किया गया, वंही विषय प्रवेश पर आते हुए बृजेश सिंह ने कहा कि देश और विश्व की वर्तमान परिस्थितियों और चुनौतियों के समाधान में माता की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि भारतीय महिला के भीतर अनेक ऐसे अंतर निहित गुण विद्यमान है, उन्हें संयुक्त परिवार सामूहिक जीवन पद्धति, आहार विहार में प्रकृति के अनुरूप का परंपरा में एवं पर पर्यावरण के प्रति व्यवहारिक आचरण आदि विषयों पर भारतीय महिला अपना दायित्व ही नहीं अपितु धर्म समझना चाहिए उन्होंने कहा की विद्या भारती द्वारा पूरे देश में 15,000 सप्तशक्ति संगम की योजना बनी है तथा संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर संघ के द्वारा निर्धारित पांच प्राण को घर-घर तक पहुंचना है। वंही मौके पर किरण राय ने कहा कि यदि एक बेटी शिक्षित होती है तो दो परिवार शिक्षित होता है हमें माता को अपनी शक्ति का आभास करना है ताकि हमारा समाज संस्कृत होकर आगे बढ़े। इस दौरान शालिनी बैसाखी यार ने कहा की महिलाएं किसी भी समाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में ट्रुथ गति से पश्चात संस्कृति अपने वाले महिलाओं से आग्रह होगा कि वह पश्चात संस्कृति को छोड़कर अपने बच्चों में भारतीय संस्कृति को का समावेश कारण सर्वप्रथम हमें स्वयं का विकास करना होगा। उसके बाद परिवार बच्चे एवं समाज का विकास करना है। संघ के पंच प्राण नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और स्वदेशी को घर-घर तक पहुंचाने का लक्ष्य माताएँ ही कर सकती हैं। इस कार्यशाला में 70 दीदी के साथ-साथ प्रधानाचार्य जीतन पंडित, प्रमोद कुमार गुप्ता, उपेंद्र कुमार राय,अ र्जुन प्रसाद आर्य, अशोक कुमार मंडल, अरुण कुमार एवं पुरुषोत्तम कुमार उपस्थित हुए। 

