रामगढ़/बोकारो, 21 अगस्त| झारखंड के ग्रामीण इलाकों में हाथियों का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाथी-मानव संघर्ष (Human-Elephant Conflict) एक गंभीर समस्या बन चुकी है, और लगातार हो रही मौतों ने ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। सवाल अब केवल एक घटना का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की विफलता और बेगुनाह ग्रामीणों की सुरक्षा का है।
रामगढ़ में ताजा हमला: एक व्यक्ति की मौत
ताजा घटना रामगढ़ जिले के गोबरदरहा इलाके से सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार (21 अगस्त) को हाथियों के हमले में एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान बोकारो जिले के महुआटांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत छोटकी पुन्नू निवासी यशवंत कुमार महतो के रूप में की गई है। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है और क्षेत्र के ग्रामीण डरे हुए हैं।
एक हफ्ते में तीन मौतें
यह घटना कोई इकलौती वारदात नहीं है। कुछ दिन पहले ही रामगढ़ जिले के चितरपुर प्रखंड के बड़की पोना में भी हाथियों के झुंड ने कहर बरपाया था, जहां घर के पास ही दो महिलाओं को हाथियों ने कुचल कर मार डाला था। महज एक हफ्ते के भीतर रामगढ़ जिले में तीन लोगों की जान जा चुकी है।
अधिकारियों पर सवाल: “कब तक डर के साए में रहेंगे?”
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने वन विभाग और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का मुख्य आक्रोश इस बात को लेकर है कि जब क्षेत्र में हाथियों के झुंड की मौजूदगी की जानकारी पहले से होती है, तो प्रशासन समय रहते पर्याप्त एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाता?
क्या संवेदनशील गांवों में वन विभाग की निगरानी और गश्ती व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है?
क्या ग्रामीणों तक हाथियों की आवाजाही की सही और समय पर सूचना पहुंच रही है?
सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि आखिर कब तक झारखंड के ग्रामीण इस संघर्ष की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे?
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की ओर से न तो समय पर चेतावनी जारी की जाती है और न ही हाथियों को खदेड़ने के लिए कोई ठोस प्रबंध किए जाते हैं।
सरकार और वन विभाग से मजबूत सुरक्षा की मांग
इस स्थिति को देखते हुए, झारखंड सरकार और वन विभाग से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की जा रही है। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में:
निगरानी (Monitoring) और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
ग्रामीणों को हाथी आने की समय पर चेतावनी (Warning System) देने की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक और स्थायी समाधान (Permanent Solution) खोजे जाएं।
यह विषय किसी पर आरोप लगाने का नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों की सुरक्षा का है जो रात भर डर के साए में जीने को मजबूर हैं। सरकार से अपील है कि अब “घटना के बाद कार्रवाई” नहीं, बल्कि “घटना से पहले सुरक्षा” सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
प्रशासन और जानकारों ने ग्रामीणों से भी सतर्क रहने की अपील की है। संघर्ष की स्थिति में इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:
हाथियों के करीब जाने की कोशिश कभी न करें।
उन्हें घेरने, उन पर पत्थर फेंकने या उनका वीडियो बनाने का जोखिम न लें।
हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं और संबंधित वन अधिकारियों या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
