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बोकारो थर्मल: डीवीसी द्वारा बसाए गए ‘नया बस्ती’ के विस्थापित वर्षों से म्यूटेशन को तरसे, डीवीसी-अंचल कार्यालय के बीच फंसा पेच

बेरमो दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) द्वारा पुनर्वासित गांव ‘नया बस्ती’ के विस्थापित वर्षों से अपनी ही जमीन के मालिकाना हक और म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के लिए भटक रहे हैं. डीवीसी प्रबंधन और अंचल कार्यालय के बीच कागजी तालमेल की कमी के कारण विस्थापितों की समस्या जस की तस बनी हुई है.

 

सांसद प्रतिनिधि जितेंद्र यादव ने बताया कि डीवीसी प्रबंधन द्वारा उन्हें नया बस्ती में बसाया तो गया, लेकिन आज तक जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला है. जब भी इस विषय पर डीवीसी प्रबंधन से बात की जाती है तो अधिकारियों का कहना होता है कि म्यूटेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज अंचल अधिकारी के पास जमा कर दिए गए हैं.

 

इसके विपरीत जब ग्रामीण अंचल कार्यालय पहुंचते हैं तो वहां बताया जाता है कि डीवीसी द्वारा अभी तक पूरे दस्तावेज सबमिट नहीं किए गए हैं, जिसके कारण म्यूटेशन की प्रक्रिया लंबित है.डीवीसी प्रबंधन और अंचल कार्यालय के इस गतिरोध के कारण गरीब विस्थापित वर्षों से मानसिक और प्रशासनिक परेशानी झेल रहे हैं. न तो वे जमीन बेच सकते हैं, न बैंक से लोन ले सकते हैं और न ही सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा पा रहे हैं l

 

विस्थापितों ने प्रशासन से मांग की है कि इस विषय को संज्ञान में लेते हुए डीवीसी प्रबंधन और संबंधित अंचल अधिकारी को संयुक्त रूप से आवश्यक निर्देश दिए जाएं. साथ ही डीवीसी द्वारा सभी लंबित दस्तावेज जल्द से जल्द अंचल कार्यालय में जमा करवाकर ‘नया बस्ती’ के विस्थापितों के पक्ष में म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी कराई जाए, ताकि उन्हें उनका मालिकाना हक मिल सके.

 

ग्रामीणों और सांसद प्रतिनिधि जीतेन्द्र यादव का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.

बेरमो संवाददाता राजेश सागर की रिपोर्ट,

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