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व्यवस्था की बेरुखी से मलबे में दबी बुजुर्ग मां की जिंदगी, मौके पर ग्रामीणों ने बचाई जान।

गिरिडीह: जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत मघाकला गांव से सरकारी दावों की पोल खोलने वाली एक दर्दनाक तस्वीर शनिवार को सामने आई है। लगातार हो रही बारिश के कारण एक बेबस बुजुर्ग मां का कच्चा आशियाना भरभराकर ढह गया। वंही इस घर गिरने से वृद्ध महिला मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गई। यह हादसा सिर्फ कुदरत का कहर नहीं, बल्कि गरीबों के प्रति सरकारी व्यवस्था की बेरुखी का जीता-जागता प्रमाण है। वंही घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण असगर अली और अन्य ग्रामीणों ने तत्परता दिखाई। ग्रामीणों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर मलबे में दबी तड़पती बुजुर्ग महिला को बाहर निकाला। इसके बाद आनन-फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। उपचार के बाद महिला की जान तो बच गई, लेकिन सिर से छत छिन जाने के कारण उन्हें अपने एक रिश्तेदार के घर शरण लेनी पड़ी है।इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर इतनी जर्जर स्थिति होने के बावजूद स्थानीय मुखिया और प्रखंड के पदाधिकारियों की नजर इस लाचार परिवार पर क्यों नहीं पड़ी? जनता पूछ रही है कि समय रहते इस गरीब परिवार को ‘अबुआ आवास योजना’ या ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ का लाभ क्यों नहीं दिया गया? क्या व्यवस्था किसी गरीब की जान जाने के बाद ही जागेगी? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पीड़िता को तुरंत सरकारी मुआवजा और पक्का आवास देने की मांग की , ऐसे इस मामले में किसी भी प्रकार का आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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