कान्हाचट्टी : केंद्र और राज्य सरकार जहां एक ओर “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” और “सक्षम आंगनबाड़ी” के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कान्हाचट्टी प्रखण्ड के *चीरीडीरी पंचायत अंतर्गत ग्राम कान्हाकला* में सरकारी आंगनबाड़ी भवन पर अवैध कब्जा कर उसे गौशाला बना दिया गया है

बच्चों की जगह बंध रही हैं भैंस
ग्राम कान्हाकला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर *बसंत नारायण सिंह* द्वारा वर्षों से अवैध कब्जा किया गया है। जिस भवन में नौनिहालों को पढ़ना और पोषाहार मिलना चाहिए था, वहां आज भैंस बांधी जा रही है। सरकारी भवन का पूरी तरह से निजी उपयोग हो रहा है।
ग्रामीणों में आक्रोश, कहा – यह सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि भले ही आंगनबाड़ी किसी कारण से बंद हो गई हो, लेकिन सरकारी भवन में सिर्फ सरकारी काम ही होना चाहिए। किसी व्यक्ति विशेष द्वारा भवन को अपने निजी उपयोग में लाना और उसमें पशु बांधना पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन और सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि – _”इतने वर्षों से अवैध कब्जा है तो सीडीपीओ, बीडीओ और पंचायत प्रतिनिधि क्या कर रहे थे? किसके संरक्षण में सरकारी भवन को गौशाला बनाया गया?”_
BDO को आवेदन दिया, फिर भी कार्रवाई नहीं
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस अवैध कब्जे को लेकर *कान्हाकला निवासी ग्रामीणों द्वारा बीडीओ कान्हाचट्टी को लिखित आवेदन* भी दिया गया है। आवेदन दिए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है और भवन खाली नहीं कराया गया है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी और *BDO कान्हाचट्टी* से मांग की है कि –
* अवैध कब्जा तुरंत हटवाकर भवन को खाली कराया जाए।
. दोषी बसंत नारायण सिंह पर सरकारी संपत्ति अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई हो।
* भवन की मरम्मत कर आंगनबाड़ी केंद्र को पुनः सुचारू रूप से चालू किया जाए ताकि बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
