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बिहार-झारखंड के 15 ठिकानों पर ED का छापा, जानें किस स्कैम में एक्शन में है प्रवर्तन निदेशालय

ED Raids Bihar Jharkhand: ईडी ने बोकारो के वन भूमि घोटाले में बिहार-झारखंड के 15 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी मनी लांड्रिंग के तहत की जा रही है। जांच कंस्ट्रक्शन कंपनियों और संचालकों से जुड़ी है। झारखंड के कारोबारी विमल अग्रवाल और पुनीत अग्रवाल की कंपनी राजवीर कंस्ट्रक्शन भी शामिल है। वन भूमि घोटाले का मामला 2022 का है।

बोकारो में जमीन घोटाले की जांच में ईडी की छापेमारी जारी

कंस्ट्रक्शन कंपनियों के ठिकानों पर ईडी ने मारे छापे

वन विभाग की जमीन के फर्जी

 

रांची: बोकारो के एक बड़े जमीन घोटाले की जांच में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार की सुबह बिहार और झारखंड में 15 जगहों पर छापे मारे गए। यह छापेमारी मनी लांड्रिंग के मामले में की जा रही है। शक है कि वन विभाग की जमीन को गलत तरीके से आवंटित किया गया था। सबसे अधिक छापे कंस्ट्रक्शन कंपनियों और उनके मालिकों से जुड़े ठिकानों पर हुए हैं। इनमें विमल अग्रवाल और पुनीत अग्रवाल की कंपनी राजवीर कंस्ट्रक्शन भी शामिल है।

ईडी की टीम कर रही छापेमारी

जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम रांची के लालपुर, बरियातू और हटिया जैसे इलाकों में भी तलाशी कर रही है। यह मामला बोकारो में वन विभाग की ज़मीन के घोटाले से जुड़ा है। इस मामले की जांच झारखंड पुलिस की सीआईडी (अपराध अनुसंधान विभाग) भी कर रही है। बता दें कि यह घोटाला 2022 में सामने आया था। आरोप है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने एक कंपनी को वन विभाग की 74.38 एकड़ जमीन दे दी थी। 2025 में बोकारो के वन प्रमंडल पदाधिकारी रजनीश कुमार ने उत्तरी छोटानागपुर के आयुक्त से इसकी शिकायत की थी।

2022 में आया था मामला सामने

रजनीश कुमार ने बताया था कि बोकारो के कुछ अधिकारियों ने 2022 में महेंद्र मिश्रा की 10 डिसमिल जमीन के कागजात में फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने महेंद्र मिश्रा के फर्जी हस्ताक्षर करके जमीन को 74.38 एकड़ कर दिया। जब महेंद्र मिश्रा को इस बात का पता चला, तो उन्होंने इजहार हुसैन, अख्तर हुसैन, रहमत हुसैन, ललन सिंह और शैलेश सिंह के खिलाफ 2024 में कोर्ट में केस दर्ज कराया। इसके अलावा, बोकारो के वन प्रमंडल पदाधिकारी ने भी सेक्टर 12 में एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज कराई थी।

कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर छापे

सीआईडी इसी मामले की जांच कर रही है। ईडी ने भी इसी केस के आधार पर ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज की है। इसी सिलसिले में मंगलवार को छापेमारी की गई। ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में कौन-कौन शामिल है और गलत तरीके से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल कहां किया गया। कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर छापे से यह पता चलता है कि ईडी को शक है कि इन कंपनियों ने घोटाले में शामिल लोगों की मदद की या उन्हें फायदा पहुंचाया।

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