मो शाहबान
सिमरिया:प्रखंड के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने रविवार को सिमरिया सुभाष चौक पर पहुंचकर विद्यालय में भोजन की खराब व्यवस्था और शौचालयों की जबरन सफाई करवाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए छात्राओं ने वार्डन अनिता कुमारी के खिलाफ नारेबाजी की और गंभीर आरोप लगाए। 
छात्राओं का कहना था कि विद्यालय में मेनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता, शौचालयों की सफाई जबरन करवाई जाती है, और वार्डन द्वारा मारपीट, अभिभावकों से मिलने पर रोक और छुट्टियां न देने जैसे व्यवहार किए जाते हैं। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही विद्यालय की शिक्षिकाएं और अकाउंटेंट मौके पर पहुंचे और एक घंटे की समझाइश के बाद छात्राओं को वापस विद्यालय ले जाया गया।
**अधिकारियों ने की जांच, दिए सख्त निर्देश**
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और जिला स्कूल समन्वयक (डीएससी) विद्यालय पहुंचे। उन्होंने छात्राओं, शिक्षकों और रसोइयों से पूछताछ की। जांच में पाया गया कि भोजन में दूध, हॉर्लिक्स और नाश्ते की सामग्री में कटौती की जाती है और मेनू के अनुसार भोजन नहीं परोसा जाता। अधिकारियों ने छात्राओं को अनुशासित रहने और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। साथ ही, किसी भी शिकायत के लिए सीधे अधिकारियों से संपर्क करने को कहा और वार्डन को अपना संपर्क नंबर विद्यालय में प्रदर्शित करने का निर्देश दिया।
**बाहरी साजिश का आरोप, होगी कार्रवाई**
अधिकारियों ने बताया कि एक अभिभावक ने छात्राओं को भड़काकर सिमरिया चौक पर प्रदर्शन के लिए उकसाया, जिसे चिह्नित कर लिया गया है। वार्डन को अनुशासन भंग करने वाली छात्राओं को चिह्नित कर विद्यालय से हटाने और लापरवाह गार्ड के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा कि विद्यालय शिक्षा का मंदिर है और गरीब छात्राओं के भोजन पर किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बाहरी तत्वों द्वारा किसी भी राजनीति पर भी उचित कदम उठाए जाएंगे।
**सवालों के घेरे में विद्यालय प्रशासन**
जांच में यह भी सामने आया कि गेट का ताला गेटकीपर के पास रहता है, फिर भी छात्राएं तख्तियां लेकर सिमरिया चौक तक कैसे पहुंचीं, यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। इससे पहले भी पूर्व वार्डन नीतेश्वरी देवी को मेनू के अनुसार भोजन न देने के कारण हटाया गया था।
**”बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” के नारे पर सवाल**
छात्राओं को अपने हक के लिए प्रदर्शन करना पड़ा और अंत में अधिकारियों के सामने माफी मांगनी पड़ी। यह स्थिति केंद्र और राज्य सरकार के “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” नारे पर सवाल उठाती है। कमजोर वर्ग की छात्राओं के हक पर डाका डालने की घटनाएं चिंताजनक हैं।
