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उपायुक्त कीर्ति श्री व पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल ने मां दुर्गा का पट खोला एवं पूजा पंडाल का उद्घाटन कर चलंत झांकी का शुरुवात किया। 

टंडवा (चतरा) दुर्गा पूजा पंडाल सेरनदाग गांव पहुंचे चतरा के उपायुक्त किर्ति श्री व चतरा पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल संयुक्त रूप से जेएमएम चतरा जिला अध्यक्ष निलेश ज्ञासेन उर्फ सोनू सिन्हा ने मां दुर्गा का पट खोल कर एवं पूजा पंडाल का उद्घाटन कर चलंत झांकी का शुरुवात किया। मुख्य अतिथि चतरा उपायुक्त किर्ति श्री ने मां का पट खोल पूजा अर्चना कर पुष्पांजलि कि। चलंत झांकी मां दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया, जो अपना रूप भैंसे, सिंह या मनुष्य के रूप में बदलता रहता था. दसवें दिन, देवी ने त्रिशूल से महिषासुर का वध किया, जिसके बाद उन्हें महिषासुरमर्दिनी का उपाधि मिला इसी के आधार पर झांकी का स्वरूप दिया गया है। झांकी एवं पंडाल का सजावट व्यवस्था के देखने के बाद उपायुक्त किर्ति श्री व पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल ने कहा कि चतरा जिला का यह पहला स्थान है जो भव्य एवं आकर्षक है। दुर्गा पूजा समिति के द्वारा सभी प्रशासन पदाधिकारी को अंग वस्त्र एवं माता रानी का स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। मौके पर मौजूद सिमरिया एसडीओ सन्नी राज, टंडवा अंचल अधिकारी सह प्रखंड पदाधिकारी देवलाल उरांव, थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर अनिल उरांव , जिला परिषद स. देवंती देवी, मुखिया सरिता देवी पंचायत समिति सदस्य राजेश चौधरी मुखिया जिला अध्यक्ष अरविंद सिंह,पूर्व जिला परिषद सदस्य बनवारी साहू,अमित साहु, सांसद प्रतिनिधि प्रेम विकास सिंह, मुखिया महावीर साहू, सुनीता देवी ,अभय सिंह, चंद्रदेव साहू एवं आसपास के सभी ग्रामीण महिलाएं व पुरुष शामिल थे।

सेरनदाग दुर्गा पूजा का इतिहास गांव के समाजसेवी उत्तम प्रसाद साहू ने बताया कि दुर्गा पूजा का स्थापना सन् 1989 में बिहार निवासी प्रशासनिक पदाधिकारी जनसेवक गिरिवरधारी प्रसाद सिंह ने ग्रामीणों को एक बैठक कर दुर्गा पूजा करने का प्रेरित किया। उनके प्रेरित से गांव के समाजसेवी उत्तम प्रसाद साहू एवं स्व. झब्बू प्रसाद साहू के पहल पर गांव के अलावे अगल-बगल के गांव कसियाडीह,पोकला,होन्हे, घघरा,बिंगलात ,पचड़ा,नयाखाप, किशुनपुर, खौलहा, कटाही के ग्रामीणों के सहयोग से बैठक कर निर्णय लिया गया कि एक पूजा कमेटी बनाकर पूजा प्रारंभ किया गया। कमेटी के नाम दुर्गा पूजा समिति सेरनदाग रखा गया जिसका संचालक जनसेवक गिरीवधारी प्रसाद सिंह,अध्यक्ष स्व. प्रसाद साहू,सचिव स्व. गंदोरी साहू, कोषाध्यक्ष स्व. झब्बू साहू थे। जो सभी लगभग 15 गांव के सहयोग से बना कर पूजा होने लगा।

दुर्गा पूजा पदाधिकारी का मुख्य भूमिका – दुर्गा पूजा सन् 1989 से आज तक मुख्य अधिकारियों का मुख्य अहम भूमिका रहा जिसमें उत्तम प्रसाद साहू, बलदेव प्रसाद साहू, चेतलाल साहू , बिशुन प्रसाद साहू, जगन्नाथ साहू,फूलचंद साहू व अन्य है  दुर्गा पूजा का प्रथम पुरोहित स्व. बनारस मिश्रा एवं पुजारी स्व. प्रभु साहू थे प्रथम नाटक मंडली में मुख्य कलाकार स्व. सोहर साहू,स्व. जयनाथ साहू, विशुन साहू, उत्तम प्रसाद साहू,सेवानिवृत्त शिक्षक बालेश्वर प्रसाद साहू,रामेश्वर साहु दूसरा ग्रुप जगन्नाथ साहू, रामदयाल साहू, शिक्षक बजरंगी प्रसाद साहू,ओम प्रकाश साहू, निर्मला साहू, गौतम साहू,किशन साहु, मोहन साहू, स्व. राजेश कुमार, स्व. ज्ञानी कुमार, चलंत झांकी सन् 2012 से प्रारंभ पूजा अध्यक्ष राम लखन प्रसाद साहू के कार्यकाल में शुरू किया गया। जो आज तक बरकरार चल रहा है। यहां सप्तमी से सांस्कृतिक कार्यक्रम किया जा रहा है जो हमारे गांव के कलाकारों द्वारा दिखाया जाता है। यहां दसवीं के मेला एवं रावण दहन का आयोजन किया जा है                यहां के दुर्गा पूजा सभी समुदाय के लोग एक साथ मिल कर पूजा मनाते हैं और जिला भर में हिंदू – मुस्लिमएकता का एक अनोखा मिसाल पेश किया करते है।

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