छठ पूजा: आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक छठ महापर्व मिथिला और बिहार में बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस पर्व का दूसरा दिन खरना के साथ प्रारंभ हो गया है, जिसमें लोग व्रत और पूजा-अर्चना के माध्यम से सूर्य देव और छठी मैया की आराधना कर रहे हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, श्री राम और माता सीता ने भी छठ पर्व मनाया था। कहा जाता है कि जब श्री राम ने रावण का वध किया था, तब ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने सीता के साथ छठ पूजा की थी। तभी से यह पर्व मिथिला और बिहार में बहुत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। जनकपुर में हमारे पटना के बियुरो चीफ राजेश सागर ने जनकपुर मे लोगों से बातचीत की और जाना कि वे इस पर्व को कितनी श्रद्धा और उत्साह के साथ मना रहे हैं। लोगों ने बताया कि छठ पर्व उनके जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है और वे इसे बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। छठ महापर्व के दौरान लोग व्रत और पूजा-अर्चना के माध्यम से सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं।आप को बता दे की ये पर्व ही ऐसा है जिसमे कोई पंडित या पुरोहित की कोई आवश्यकता नहीं होती कहने का तात्पर्य है कि वर्ती और प्रकृति का सीधा संबंध है जो पर्व को और महान बना देता है इस पर्व का उद्देश्य प्राकृतिक सौंदर्य और परिवार के कल्याण के लिए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करना है।
बेरमो संवाददाता राजेश सागर की रिपोर्ट,
