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देवचरण को मिली विद्या वाचस्पति मानद उपाधि

दीपक सिंह कि रिपोर्ट 

Chatra: राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक देवचरण दांगी को शिक्षण कार्य एवं सामाजिक कार्यों में अतुलनीय योगदान के लिए विद्या वाचस्पति (मानद पीएचडी )उपाधि प्रदान की गई। यह उपाधि श्री दांगी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ मथुरा ,उत्तर प्रदेश की ओर से नई दिल्ली स्थित होटल रेडिसन ब्लू के स्वागत सभागार में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम ‘ राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी और उपाधि वितरण एवं सम्मान समारोह ‘ के दौरान दी गई। विद्यापीठ के प्रबंध कार्य समिति द्वारा श्री दांगी का चयन पूर्व में किया जा चुका था। मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामय उपस्थिति से समारोह के कार्यक्रम में चार चांद लगाने का काम राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पद्मश्री डॉ अरविंद कुमार पूर्व कुलपति रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी ने किया। समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ ऋतु दुबे तिवारी शिक्षाविद एवं वरिष्ठ साहित्यकार गाजियाबाद की उपस्थिति भी उपाधि वितरण कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। समारोह की अध्यक्षता जाने माने विद्वान डॉक्टर इंदु भूषण मिश्रा कुलपति पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ मथुरा ने की। इस कार्यक्रम में डॉ ,एस प्रकाश, डॉ शिवाजी शिंदे, डॉ कुलवंत सिंह सलूजा, प्रबल प्रताप के अतिरिक्त पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ के पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए आग्रह के अनुसार समस्त संस्थाओं को पूर्व में प्रचलित पश्चात्य संस्कृति के गाउन एवं केप के स्थान पर भारतीय संस्कृति को अपनाने के लिए भारतीय परिधान में अभ्यर्थियों को मानद उपाधि प्रदान की गई।

देवचरण दांगी को विद्या वाचस्पति (मानद पीएचडी )का सम्मान मिलना गौरव की बात है ।ज्ञातव्य है कि श्री दांगी किसी परिचय के मोहताज नहीं है। चतरा जिला और झारखंड राज्य में श्री दांगी एक शिक्षाविद के रूप में विख्यात है। श्री दांगी को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यो के लिए वर्ष 2006 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के कर कमलों द्वारा “राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान” प्राप्त करने का गौरव हासिल है । उन्हें वर्ष 2001 और 2021 में झारखंड सरकार द्वारा ‘ राजकीय शिक्षक सम्मान’ भी मिल चुका है ।नई दिल्ली में वर्ष 2009 में ‘” राष्ट्रीय विद्या ज्योति अवार्ड एवं गोल्ड मेडल” से भी वे सम्मानित हो चुके हैं। वर्ष 2002 में हजारीबाग के तत्कालीन कमिश्नर एनकेपी शर्मा द्वारा भी कमिश्नरी का आदर्श शिक्षक का पुरस्कार मिला है। चतरा जिले के कई उपायुक्तों ने भी शिक्षक दिवस के अवसर पर बेहतर कार्य के लिए आदर्श शिक्षक का पुरस्कार श्री दांगी को दिया है । शिक्षा के अतिरिक्त सामाजिक कार्यों में भी श्री दांगी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कई मौके पर सामाजिक कार्यों के लिए भी श्री दांगी पुरस्कृत किया जा चुके हैं। गिद्धौर प्रखंड की स्थापना में उनका बहुमूल्य योगदान है ।उन्होंने प्रखंड निर्माण संघर्ष समिति का गठन कर तथा लोगों को एकजुट कर समाज के लोगों की आवाज को बिहार सरकार तक पहुंचाने का काम किया। चतरा में उपेंद्रनाथ वर्मा महाविद्यालय की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री दांगी दो-दो बार महाविद्यालय के अध्यक्ष भी रह चुके हैं । श्री दांगी के नेतृत्व में चतरा लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं को जगाने के लिए ‘ वोट फॉर लोकल’ अभियान मील का पत्थर साबित हुआ। इसके अलावे खेल के लिए प्रोत्साहन, पर्यावरण का संरक्षण, अनाथ बच्चों की शिक्षा, बच्चियों की शादी, कोविद के दौरान लोगों की सहायता करना जो उनका स्वाभाविक गुण है ,उसके अनुसार उन्होंने किया है। देवचरण दांगी का जीवन अनुकरणीय है तथा वे प्रेरणा के स्रोत है। लखनऊ की सुलोचना मौर्या,मुंबई से कौशल बखाई तथा अन्य कई लोगों के साथ ही झारखंड से श्री दांगी के अतिरिक्त गोड्डा निवासी उदय कांत सिंह को भी दिल्ली में विद्या वाचस्पति (मानद पीएचडी )की उपाधि प्रदान की गई ।श्री सिंह भी राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त सेवानिवृत शिक्षक हैं।

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