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करोड़ों का राजस्व देने वाला बेरमो का ‘अवर निबंधक सह विशेष विवाह पदाधिकारी’ कार्यालय खुद बदहाली के आंसू बहाने को मजबूर

बेरमो (बोकारो): एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और सरकारी दफ्तरों के आधुनिकीकरण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो का ‘अवर निबंधक सह विशेष विवाह पदाधिकारी कार्यालय’ (Sub-Registrar Office) खुद अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। सालाना करोड़ों रुपये का राजस्व (रेवेन्यू) सरकार के खजाने में देने वाला यह कार्यालय आज खुद एक बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहा है।

जर्जर भवन और टपकती छत: हर पल हादसे का डर

कार्यालय की जो तस्वीरें और स्थिति सामने आई है, वह बेहद डरावनी है। कार्यालय का पूरा ढांचा अत्यंत खस्ताहाल और जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है।

  • दरकती दीवारें: भवन की दीवारों पर जगह-जगह लंबी और गहरी दरारें साफ देखी जा सकती हैं।
  • झड़ता प्लास्टर: छत से आए दिन पेंट और कंक्रीट का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। यहाँ काम करने वाले कर्मचारी और आने वाले आम लोग हमेशा इस डर में रहते हैं कि कब कोई बड़ा हिस्सा उनके सिर पर न गिर जाए।
  • टूटा फर्नीचर और गंदगी: दफ्तर के भीतर टूटी कुर्सियाँ, पुराना बेकार पड़ा फर्नीचर और चारों तरफ जमी गंदगी की परतें यह बताने के लिए काफी हैं कि लंबे समय से इस कार्यालय की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

धूल फांकते महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज

सबसे हैरान और चिंतित करने वाली बात यह है कि इस कार्यालय में रखे करोड़ों की जमीनों के दस्तावेज, रजिस्ट्री फाइलें और विवाह संबंधी अत्यंत महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड धूल फांक रहे हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण इन जरूरी कागजातों के नष्ट होने या चोरी होने का खतरा हमेशा बना रहता है। अगर कोई अनहोनी या अगलगी की घटना होती है, तो हजारों लोगों के जरूरी दस्तावेज पल भर में खाक हो जाएंगे।

कर्मचारियों और आम जनता की जान जोखिम में

इस उप-निबंधक कार्यालय में हर दिन सैकड़ों लोग अपनी जमीनों की रजिस्ट्री, मैरिज रजिस्ट्रेशन और अन्य जरूरी कागजी कामों के लिए आते हैं।

“यह स्थिति न केवल यहाँ दिन-रात काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए जानलेवा है, बल्कि अपने काम से आने वाली आम जनता के लिए भी एक बड़ा जोखिम बनी हुई है।”

बड़ा सवाल: करोड़ों का रेवेन्यू देने वाले दफ्तर की यह हालत क्यों?

स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि जो दफ्तर सरकार को हर साल करोड़ों रुपये की कमाई करके देता है, उसके रखरखाव के लिए बजट न होना प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा है। आखिर इस राजस्व का एक छोटा सा हिस्सा भी इस कार्यालय की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं पर क्यों नहीं खर्च किया जा रहा?

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