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चीन का पलटवार, अमेरिकी सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 125% किया, सामने आई शी जिनपिंग की पहली प्रतिक्रिया

अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं।

अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ वॉर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर टैरिफ को बढ़ाकर 145 फीसदी कर दिया तो चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इसे 84 फीसदी से बढ़ाकर 125 फीसदी कर दिया। अमेरिका और चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं।

 

नई दिल्ली: अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ वॉर लगातार गहराता जा रहा है। चीन ने अमरीका से आने वाले सामान पर टैरिफ 84% से बढ़ाकर 125% कर दिया है। यह 12 अप्रैल से लागू होगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को छोड़कर बाकी सभी देशों को रेसिप्रोकल टैरिफ पर 90 दिन की छूट दी थी। लेकिन चीन पर इसे बढ़ाकर 145 फीसदी कर दिया। इसके जवाब में अब चीन ने भी अमेरिका सामान पर टैरिफ बढ़ा दिया है लेकिन साथ ही कहा है कि वह इसे 125 फीसदी से ज्यादा नहीं करेगा। अमेरिका और चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का ट्रेड होता है जिसमें अमेरिका घाटे में है। दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर से दुनिया में मंदी आने और महंगाई बढ़ने की आशंका है।

चीन की कॉमर्स मिनिस्ट्री के प्रवक्ता ने अमेरिकी सामान पर टैरिफ बढ़ाने की बात कही है। प्रवक्ता ने कहा, ‘अमरीका की तरफ चीन पर लगातार बहुत ज्यादा टैक्स लगाना सिर्फ एक नंबर का खेल बन गया है। इसका कोई असली आर्थिक मतलब नहीं है। इससे सिर्फ अमरीका का ये तरीका दिखता है कि वो टैक्स को डराने-धमकाने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। इससे वो खुद ही दुनिया में मजाक बन गया है। गर अमरीका टैक्स के साथ ये नंबर का खेल जारी रखता है, तो चीन इसमें शामिल नहीं होगा। लेकिन, अगर अमरीका चीन के हितों को नुकसान पहुंचाता रहा, तो चीन जवाबी कार्रवाई करेगा और अंत तक लड़ेगा।’

शी जिनपिंग ने क्या कहा

इस बीच टैरिफ पर पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बयान सामने आया है। उनका कहना है कि चीन किसी से डरता नहीं है। शी जिनपिंग ने स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ से बीजिंग में कहा कि व्यापार युद्ध में कोई नहीं जीतता है। दुनिया के खिलाफ जाने से सिर्फ खुद को अलग-थलग किया जा सकता है। 70 साल से ज्यादा समय से चीन का विकास आत्मनिर्भरता और कड़ी मेहनत पर निर्भर रहा है। यह कभी भी दूसरों से मिलने वाली मदद पर निर्भर नहीं रहा है। और चीन किसी भी अन्यायपूर्ण दबाव से डरता नहीं है।

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