सीसीएल प्रबंधन की लापरवाई से सुलग रही झिरकी, ले रहा दूसरे झरिया का रूप
कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण सैकड़ों लोग सांस संबंधित बीमारियों की चपेट में

झिरकी/बोकारो: उच्च कोटि के कोयला उत्पादन के लिए ख्यातिप्राप्त कथारा क्षेत्र अंतर्गत “झिरकी” की स्थिति निकट भविष्य में अगर “झरिया” जैसी हो जाए तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होनी चहिए। जी हां यह सिर्फ़ एक आशंका नहीं है। वीडियो फुटेज में आप देख रहे हैं कि किस तरह खनन एरिया के अलग अलग स्थानों में आग धधक रही है और उससे ज़हरीले धुएं और गैस निकल रहा है।
लाइव 11 न्यूज टीम के द्वारा ग्राउंड ज़ीरो का जायज़ा लेने पर पता चला है कि कथारा कोलियरी का खनन प्वाइंट झिरकी गांव के एकदम निकट पहुंच गया है। वहीं डंपिंग भी गांव के बिल्कुल क़रीब है, जिससे निकलने वाले हानिकारक गैस की चपेट में गांव के अनेकों लोग आ गए हैं। विडम्बना तो यह है कि बूढ़े बुज़ुर्ग के साथ युवा और छोटे बच्चे भी इससे प्रभावित हो कर सांस की गंभीर बीमारी के शिकार हो रहे हैं। एक्सपर्ट से बात करने पर बताया गया कि डंपिंग से निकलने वाले गैस को मेडिकल भाषा में कार्बन मोनोऑक्साइड कहते हैं। इसके संपर्क में आने से सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं अधिक संपर्क में आने से यह जानलेवा भी हो सकता है।
वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि कार्बन मोनोऑक्साइड की वजह से गांव के एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों लोग सांस की बीमारी का शिकार हो कर अपनी मेहनत की कमाई और जानें गंवा चुके हैं। उन्होंने पीड़ा व्यक्त करते हुए यह जानकारी भी दी कि सीसीएल प्रबंधक से इस बारे में कई दफा शिकायत की गई किंतु इस पर ध्यान नहीं दिया गया, सीसीएल की उदासीनता के कारण कई ऐसे परिवार हैं जिन्होंने स्वास्थ जीवन यापन के लिए विवश हो कर गांव छोड़ दिया और दूसरे स्थानों में शिफ्ट हो गए। लोगों ने बताया कि अंडरग्राउंड झीरकी सुलग रहा है, अगर वक्त रहते सीसीएल प्रबंधन के द्वारा सकारात्मक उपाय नहीं किया गया तो भविष्य में इसके दुष्परिणामों का गवाह आने वाली पीढ़ी बनेगी, और झारखण्ड में एक झरिया का उदय होने से कोई रोक नहीं सकता।
