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NTPC एचओपी आलोक कुमार त्रिपाठी ने तमाम विभागों के प्रबंधको की मौजूदगी में पत्रकारों के साथ सीधे संवाद।

कामेश्वर गुप्ता कि रिपोर्ट

टंडवा: चतरा जिला स्थित एनकेएसटीपीपी टंडवा (नार्थ करनपुरा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट ) की उपलब्धियां, जनसरोकारों से जुड़े अपेक्षा और संभावनाओं पर एचओपी आलोक कुमार त्रिपाठी ने तमाम विभागों के प्रबंधको की मौजूदगी में पत्रकारों के साथ सीधे संवाद में सभी सवालों के बेबाकी से जबाब दिये। पिछले ढ़ाई दशक का लंबा वक्त 21,495 करोड़ रुपये की लागत से 23 सौ एकड़ में फैले संयंत्र और विभिन्न संरचनाओं के निर्माण में लगे बहरहाल अब तीनों यूनिट द्वारा पूरी क्षमता से बिजली का उत्पादन हो रहा है। सुपर थर्मल पावर में कूल्ड कंडेंसर तकनीक से अन्य परियोजनाओं की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत पानी की कम खपत इस प्रोजेक्ट को खाश बनाता है। वहीं कोयले की आपूर्ति के लिये भारतवर्ष का सर्वाधिक लंबी कोल कन्वेयर बेल्ट निर्माण जिसकी लम्बाई 7.5 किलोमीटर है,वो कुछ हीं महीनों में हीं पूर्ण हो जायेगा।

बताया गया कि इसके निर्माण में पर्यावरण की अनुकूलता को पूरी तरह से ध्यान में रखा गया है। इसके माध्यम से प्रति घंटे 4 हजार टन कोयले की ढुलाई मगध परियोजना से सीधे प्लांट तक होगी। फलत: सड़कों में भारी वाहनों के परिचालन भार क्षमता में स्वाभाविक तौर पर कटौती हो जायेगा।

स्वच्छ और सस्ता लगभग पौने दो रुपये प्रति यूनिट उत्पादित बिजली का व्यवसायिक उपयोग बिहार, झारखंड, उड़ीसा एवं सिक्किम राज्य में सफल आपूर्ति हो रही है। उपार्जित लाभांश का बड़ा हिस्सा खाशकर परियोजना प्रभावित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विकास व अन्य सामुदायिक विकास में व्यय होता है।

हालांकि , ग्रामीण सड़कों से हो रहे फ्लाई ऐश की ढुलाई के कारण प्रदूषण का प्रभाव और रोकथाम के लिये अपनाये जा रहे विकल्प चर्चा के केंद्र में रहा। एनटीपीसी प्रबंधन ने माना कि टंडवा -सिमरिया मुख्य सड़क क्षेत्र तथा पांडे मोड़ -बसरिया रोड़ में बड़े पैमाने पर राख डंप हैं।उसे साफ- सफाई कराया जायेगा। ढुलाई के निर्धारित शर्तों में साफ- सफाई की शर्तें शामिल हैं जिसका उल्लंघन करने वाले संबंधित ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों पर लाखों रुपए जुर्माने लगे हैं तथा आगे भी लगाये जायेंगे।आश्वस्त किया गया कि ओवरलोडिंग तथा गीले राख की ढुलाई पर लगाम लगाने हेतु इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जा रहा है जिससे आने वाले दिनों में पूरी तरह से विराम लग जाएगा।सही रेट में ठेकेदारों के साथ कान्ट्रेक्ट और ढुलाई के लिये निर्धारित शर्तों की बाध्यता कड़ाई से लागू करने पर प्रबंधन का विशेष फोकस है। टंडवा – सिमरिया मुख्य सड़क में शीघ्र हीं प्रबंधन द्वारा टीम गठित उच्चस्तरीय जांच टीम द्वारा निरीक्षण की जायेगी। हालांकि, कोयले की खपत और उत्पादन के अनुपात में देखा जाये तो कम मात्रा में ढुलाई होना परियोजना प्रबंधन के लिये चिंता का सबब बनता जरुर दिखाई दे रहा है।

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