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सुरक्षित इंटरनेट दिवस 2026 के अवसर पर साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन।

छात्रों – युवाओं और अभिभावकों की भूमिका अहम, साइबर अपराध से बचाव के लिए जरूरी है सावधानियां।

बोकारो: सुरक्षित इंटरनेट दिवस 2026 के अवसर पर मंगलवार को जीजीएसईएसटीसी, कांड्रा चास के सभागार में साइबर सुरक्षा विषय पर एक व्यापक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन, विशेषकर छात्रों, युवाओं, अभिभावकों एवं शिक्षकों को इंटरनेट के सुरक्षित, जिम्मेदार एवं विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक, उत्तरी छोटानापुर प्रमंडल सुनील भास्कर, पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, एसडीपीओ चास प्रवीण कुमार, ट्रैफिक डीएसपी विद्या शंकर, जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी धनंजय कुमार सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, शिक्षाविद, छात्र एवं आम नागरिक उपस्थित थे।

 

डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा समय की आवश्यकता : आइजी

कार्यशाला को संबोधित करते हुए पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) सुनील भास्कर ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में इंटरनेट हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। शिक्षा, बैंकिंग, शासन, संचार एवं मनोरंजन सहित लगभग हर क्षेत्र में इंटरनेट का व्यापक उपयोग हो रहा है, किंतु इसके साथ ही साइबर अपराधों की घटनाओं में भी तेजी से वृद्धि हुई है।

उन्होंने ऑनलाइन ठगी, फर्जी वेबसाइट एवं लिंक, ओटीपी एवं केवाईसी धोखाधड़ी, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, फर्जी प्रोफाइल तथा व्यक्तिगत डेटा की चोरी जैसी बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। आइजी ने आम नागरिकों से इंटरनेट का उपयोग करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की।

छात्रों, युवाओं और अभिभावकों की अहम भूमिका

आइजी ने विशेष रूप से छात्रों और युवाओं को सोशल मीडिया का सुरक्षित, सीमित एवं जिम्मेदार उपयोग करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जहां अभिव्यक्ति का माध्यम हैं, वहीं इसके दुरुपयोग से मानसिक, सामाजिक और कानूनी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

उन्होंने अभिभावकों एवं शिक्षकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने, उन्हें डिजिटल शिष्टाचार एवं साइबर सुरक्षा के मूलभूत नियमों की जानकारी देने का आग्रह किया।

साइबर अपराध से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

आइजी भास्कर ने साइबर अपराधों से बचाव हेतु मजबूत पासवर्ड के उपयोग, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, सोशल मीडिया की गोपनीयता सेटिंग्स को अपडेट रखने तथा किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक, कॉल, ई-मेल एवं मैसेज से दूर रहने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि साइबर अपराध की किसी भी घटना की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज की जा सकती है। अंत में उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के लिए नागरिकों की सजगता जरूरी : एसपी

मौके पर पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरविंदर सिंह ने कहा कि *डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग आज के समय की बड़ी आवश्यकता है। साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी डिजिटल गतिविधियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए आमजन को अधिक सतर्क और जागरूक होने की जरूरत है।

उन्होंने लोगों से ओटीपी साझा न करने, अज्ञात कॉल या लिंक से बचने, सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी सीमित रखने तथा किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन ऑफर से दूर रहने की अपील की। एसपी ने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा नियमित रूप से साइबर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

डिजिटल सशक्तिकरण के साथ साइबर सुरक्षा अनिवार्य : डीडीसी

मौके पर उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने शासन, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सुलभ एवं पारदर्शी बनाया है। हालांकि, इसके सुरक्षित उपयोग के लिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने युवाओं और छात्रों से जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने की अपील की तथा अभिभावकों एवं शिक्षकों से बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की निरंतर शिक्षा देने का आग्रह किया।

सुरक्षित इंटरनेट दिवस के उद्देश्य और इतिहास पर प्रकाश

कार्यक्रम के दौरान जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी धनंजय कुमार ने सुरक्षित इंटरनेट दिवस के महत्व, इसके उद्देश्य एवं इतिहास के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) के जिम्मेदार उपयोग पर प्रकाश डालते हुए मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, प्राइवेसी सेटिंग्स एवं डिजिटल सतर्कता की आवश्यकता* पर जोर दिया।

मौके पर एसडीपीओ चास प्रवीण कुमार, ट्रैफिक डीएसपी विद्या शंकर,जीजीएसईएसटीसी के निदेशक – प्राचार्य आदि ने भी अपना वक्तव्य रखा।

सामूहिक प्रयास से ही संभव है सुरक्षित डिजिटल भविष्य

कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश दिया गया कि सुरक्षित डिजिटल भविष्य के निर्माण के लिए प्रशासन, पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों, अभिभावकों और नागरिकों के सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। सुरक्षित इंटरनेट उपयोग से ही एक जागरूक, सशक्त एवं सुरक्षित समाज का निर्माण संभव है।

मोहम्मद सेराज की रिपोर्ट,

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