चाईबासा: झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में नक्सलियों के सबसे मजबूत किले को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा बलों ने कमर कस ली है। CRPF के महानिदेशक (DG)ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह शुक्रवार को एक बार फिर चाईबासा पहुंचे। गौरतलब है कि पिछले 40 दिनों के भीतर महानिदेशक का यह दूसरा दौरा है, जिसने माओवादी खेमे में हलचल तेज कर दी है।
मिशन ‘कोल्हान’ पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक, DG ने चाईबासा स्थित CRPF कैंप में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में कोल्हान के जंगलों में सक्रिय एक करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा और उसके दस्ते के खिलाफ चल रहे अभियानों की प्रगति रिपोर्ट ली गई।
दौरे के मुख्य बिंदु:
रणनीतिक समीक्षा: सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों में सुरक्षा बलों की तैनाती और ‘फॉरवर्ड कैंपों’ की सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया गया।
IED का खतरा: हाल के दिनों में नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर बम और IED से जवानों को हो रहे नुकसान को कम करने के लिए नई तकनीक और SOP पर चर्चा की गई।
समन्वय: झारखंड पुलिस और CRPF के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर नक्सलियों के सप्लाई चेन को काटने की रणनीति बनाई गई।
“सुरक्षा बलों का मनोबल ऊंचा है। हम कोल्हान के दुर्गम इलाकों में भी अपनी पहुंच बना चुके हैं। नक्सलियों के पास अब सरेंडर करने या पकड़े जाने के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं बचेगा।” — सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी का बयान
क्यों अहम है यह दौरा?
कोल्हान का इलाका फिलहाल नक्सलियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। DG का बार-बार यहां आना यह दर्शाता है कि केंद्र और राज्य सरकार इस क्षेत्र को पूरी तरह ‘नक्सल मुक्त’ घोषित करने के लिए किसी बड़े ऑपरेशन की तैयारी में हैं। संभव है कि आने वाले दिनों में सुरक्षा बल एक साथ कई मोर्चों पर बड़ा प्रहार शुरू करें।
