जेरेडीह (बोकारो): शिक्षा के प्रति समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मिसाल प्रखंड अंतर्गत अराजू उत्क्रमित मध्य विद्यालय में देखने को मिली। नामांकन प्रभारी के विशेष प्रयासों से एक गरीब परिवार की नन्हीं बेटी के कदम अब स्कूल की दहलीज तक पहुँच चुके हैं, जिससे न केवल उस बच्ची के चेहरे पर मुस्कान लौटी है, बल्कि पूरे विद्यालय परिवार में उत्साह का माहौल है।
मुख्य झलकियां
- छात्रा का नाम: समीरा खातून (पिता: सरफराज अंसारी)
- कक्षा: प्रथम वर्ग (रोल नंबर – 22)
- विशेष प्रयास: नामांकन प्रभारी विपत्तारण की सक्रिय भूमिका।
खुशी से झूम उठी नन्हीं समीरा
कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जैसे ही समीरा का नामांकन सुनिश्चित हुआ, वह अपनी खुशी रोक नहीं पाई। विद्यालय परिसर में मौजूद शिक्षकों और अन्य छात्रों ने तालियों के साथ उसका स्वागत किया।

इस अवसर पर नन्हीं समीरा ने अपनी मासूमियत और दृढ़ संकल्प के साथ कहा:
“मैं पढ़-लिखकर बहुत आगे बढ़ना चाहती हूँ और अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहती हूँ।”
विद्यालय प्रशासन का संकल्प
नामांकन प्रभारी विपत्तारण ने इस मौके पर कहा कि विद्यालय का लक्ष्य क्षेत्र के हर अंतिम बच्चे तक शिक्षा पहुँचाना है। उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी दोहराते हुए कहा कि आर्थिक तंगी किसी भी बच्चे की पढ़ाई में बाधा नहीं बननी चाहिए।
अभिभावकों के लिए विशेष संदेश
विद्यालय प्रशासन ने ग्रामीणों और अभिभावकों से शिक्षा के महत्व को समझने की अपील की है। मुख्य बिंदु जो साझा किए गए:
नियमितता: बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजें ताकि उनकी नींव मजबूत हो सके।
सरकारी योजनाएं: निःशुल्क शिक्षा, पोशाक और मध्याह्न भोजन जैसी सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं।
सामूहिक सहयोग: बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए स्कूल और अभिभावकों का मिलकर काम करना अनिवार्य है।
निष्कर्ष
समीरा का नामांकन महज एक दाखिला नहीं है, बल्कि यह गरीबी और अभावों के बीच उम्मीद की एक नई शुरुआत है। स्थानीय ग्रामीणों ने विद्यालय के इस मानवीय और संवेदनशील कदम की मुक्त कंठ से सराहना की है।
रिपोर्ट: सरफराज अंसारी संवाददाता, जेरेडीह
