कथारा/जारंगडीह: झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) की एक बड़ी और जानलेवा लापरवाही इन दिनों कथारा से जरीडीह बाजार जाने वाले मुख्य मार्ग पर चर्चा का विषय बनी हुई है। यहाँ रहमत मोड़ के पास स्थित ‘हिंदुस्तान हार्डवेयर’ नामक दुकान और मकान के ऊपर से गुजर रही 11,000 वोल्ट की हाई टेंशन (HT) लाइन कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। बिजली विभाग की इस अनदेखी ने स्थानीय निवासियों और दुकानदारों की जान को जोखिम में डाल दिया है।

नियमों की धज्जियां उड़ी, मात्र 4 फीट की दूरी पर है ‘काल’
बिजली विभाग के नियमों के मुताबिक, हाई टेंशन लाइनों को आबादी वाले क्षेत्रों और आवासीय छतों से कम से कम 12 से 15 फीट की सुरक्षित दूरी पर होना अनिवार्य है। लेकिन रहमत मोड़ पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत और भयावह है:
हादसे को सीधा न्योता: निर्माणाधीन मकान की छत और जानलेवा तारों के बीच महज 4 फीट का फासला है। ऐसे में छत पर जाने वाले किसी भी व्यक्ति, विशेषकर बच्चों का हाथ या शरीर इस तार की चपेट में आसानी से आ सकता है।
मौसम बदलते ही दोगुना होता है खतरा: स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज हवाओं के चलने पर तारों के आपस में टकराने या हिलने से चिंगारी निकलती है। वहीं, बारिश के मौसम में छत पर नमी आने के कारण पूरी इमारत में करंट उतरने का खतरा हर वक्त बना रहता है।
आक्रोश: क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है विभाग?
इस जानलेवा स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और दुकानदारों में भारी डर और आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को खुली दावत दे रही है। यदि समय रहते इन तारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया गया, तो विभाग की इस सुस्ती की भारी कीमत किसी निर्दोष को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है।
“हम हर वक्त डर के साये में जीने को मजबूर हैं। छत पर जाना मौत के कुएं में झांकने जैसा है। बिजली विभाग को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किए बिना तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
— स्थानीय निवासी
बिजली विभाग (JBVNL) से अविलंब कार्रवाई की मांग
कथारा और जरीडीह बाजार के प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय निवासियों ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के आला अधिकारियों और स्थानीय बिजली संकट निवारण टीम से इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
इन हाई टेंशन तारों को घनी आबादी और मकान की छत से तुरंत हटाया जाए।
जब तक तारों को शिफ्ट नहीं किया जाता, तब तक इनकी ऊंचाई को बढ़ाकर सुरक्षित स्तर (नियमों के अनुसार) पर ले जाया जाए।
बिजली विभाग के अधिकारियों को इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कदम उठाना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
