रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के ऑनलाइन भू-अभिलेखों (Land Records) में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और विसंगतियों पर गंभीर रुख अपनाते हुए एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकल पीठ ने आदेश दिया है कि अब भूमि से संबंधित ऑनलाइन रिकॉर्ड को संबंधित अंचल अधिकारी (CO) भौतिक अभिलेखों (Physical Records) से मिलान कर सत्यापित करेंगे। इसके बाद ही इसे डिजिटल हस्ताक्षर के साथ पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा।
अदालत ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को इस आदेश का तत्काल और कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
🚨 मुख्य बिंदु: हाईकोर्ट के कड़े निर्देश
मिरर कॉपी होना जरूरी: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन भूमि पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड, भौतिक रजिस्टर-2 और अन्य मूल अभिलेखों की हूबहू प्रतिलिपि यानी “मिरर कॉपी” होना चाहिए।
पहले से अपलोडेड डेटा का होगा री-वेरिफिकेशन: अदालत ने कहा कि जो रिकॉर्ड पहले से पोर्टल पर अपलोड हैं, उनका भी भौतिक अभिलेखों से पुनः सत्यापन किया जाए। यदि कोई विसंगति मिलती है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत तत्काल सुधार हो।
बिना वेरिफिकेशन नहीं दिखेगा रिकॉर्ड: अब सभी जिलों के CO ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान करेंगे, डिजिटल हस्ताक्षर करेंगे और केवल सत्यापित प्रविष्टियां ही जनता को पोर्टल पर दिखाई देंगी।
🔍 क्यों लिया कोर्ट ने यह फैसला? (डेटा एंट्री ऑपरेटरों की लापरवाही)
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आनंद सेन ने हाल के दिनों में आ रही याचिकाओं पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा:
“ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड और भौतिक रजिस्टर में भारी अंतर है। कहीं नाम गलत है, तो कहीं भूमि का रकबा या प्लॉट नंबर में त्रुटियां हैं। ये गड़बड़ियां आउटसोर्स एजेंसियों के डेटा एंट्री ऑपरेटरों की लापरवाही या मानवीय भूल के कारण हुई हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।”
कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड का राजस्व अधिकारियों द्वारा पहले सत्यापन किया जाता था, इसी वजह से लोगों को मामूली सुधार के लिए भी कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
📋 मामला क्या था? (लोहरदगा के राम प्रकाश भगत की याचिका)
यह आदेश लोहरदगा जिले के कुरू प्रखंड के बरीडीह गांव निवासी राम प्रकाश भगत उर्फ राम प्रकाश उरांव की याचिका पर आया।
शिकायत: याचिकाकर्ता के पूर्वजों का नाम मूल भौतिक अभिलेखों और रिविजनल सर्वे खतियान में बिल्कुल सही दर्ज है। लेकिन, वर्तमान सर्वे रिकॉर्ड और ऑनलाइन रजिस्टर-2 में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया।
अधिकारियों की उदासीनता: याचिकाकर्ता ने सुधार के लिए अंचल अधिकारी (CO) से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
⏱️ कोर्ट का अल्टीमेटम: 3 सप्ताह में आवेदन, 12 सप्ताह में सुधार
हाईकोर्ट ने इस मामले का निपटारा करते हुए सख्त समय-सीमा तय की है:
याचिकाकर्ता को निर्देश: 3 सप्ताह के भीतर कुरू के अंचल अधिकारी (CO) के समक्ष सुधार के लिए आवेदन दें।
CO को निर्देश: आवेदन मिलने के बाद अंचल अधिकारी सभी भौतिक अभिलेखों की जांच करेंगे। यदि मूल रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता या उनके पूर्वजों का नाम सही पाया जाता है, तो आवश्यक सुधार करेंगे।
डेडलाइन: अदालत ने इस पूरी सुधार प्रक्रिया को 12 सप्ताह (3 महीने) के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है।
🚀 तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई के आदेश
हाईकोर्ट ने इस आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव और राजस्व विभाग के सचिव को तत्काल फैक्स और ई-मेल के जरिए भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही विभागीय सचिव को आदेश दिया गया है कि वे इस फैसले को पूरे राज्य में लागू करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक दिशानिर्देश (Circular) तुरंत जारी करें।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
