नई दिल्ली: राजधानी के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित दो दिवसीय 13वां ब्रिक्स अर्बनाइजेशन फोरम (BRICS Urbanization Forum) ‘समावेशी, लचीले और जन-केंद्रित शहरी विकास’ पर मंत्रिस्तरीय घोषणापत्र को अपनाने के साथ संपन्न हो गया। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस उच्च स्तरीय फोरम में ब्रिक्स देशों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और शहरी विशेषज्ञों ने ‘सिटीज फॉर पीपल: ब्रिक्स कोऑपरेशन फॉर इन्क्लूसिव एंड रेजिलिएंट अर्बन फ्यूचर’ विषय पर गहन मंथन किया।

भारत ने चौथी बार इस प्रतिष्ठित मंच की मेजबानी की है। इससे पहले भारत 2013 (नई दिल्ली), 2016 (विशाखापत्तनम) और 2021 (वर्चुअल) में इसका सफल आयोजन कर चुका है।
डिजिटल नवाचार और सामाजिक समावेश पर जोर
फोरम का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा:
“यह मंच शहरी एजेंडे को वैश्विक विकास विमर्श में मजबूती से लाने का एक बड़ा अवसर है। समावेशी शहरी विकास, जलवायु और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा, मजबूत संस्थान और डिजिटल नवाचार भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण के प्रमुख स्तंभ हैं।”
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने ‘इंडियाज अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन: स्टोरीज ऑफ Change’ नामक एक विशेष प्रकाशन का भी विमोचन किया, जिसमें देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की बेहतरीन शहरी प्रथाओं को संकलित किया गया है।
उच्च स्तरीय पैनल चर्चा और भारत का प्रतिनिधित्व
फोरम के दूसरे दिन आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री तोखन साहू की अध्यक्षता में दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं हुईं:
लचीले और न्यायसंगत शहरों के लिए समावेशी मार्ग निर्माण:
मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री रूपा मिश्रा द्वारा संचालित इस सत्र में केंद्रीय शहरी कार्य सचिव श्री श्रीनिवास कटिकिथला ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा, “शहरी विकास की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि शहर कितना उपभोग करते हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि वे जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए संसाधनों का कितनी कुशलता और समानता से उपयोग करते हैं।”
जन-केंद्रित शहरों के लिए संस्थानों को सुदृढ़ बनाना:
NCRTC के प्रबंध निदेशक श्री शलभ गोयल द्वारा संचालित इस सत्र में मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव श्रीमती डी. तारा ने हिस्सा लिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहरी गवर्नेंस का भविष्य अलग-थलग नवाचारों में नहीं, बल्कि उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने वाले मजबूत संस्थानों में निहित है।
‘ब्रिक्स अर्बन रिसर्च एंड नॉलेज नेटवर्क’ को हरी झंडी
इस फोरम की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत के उस प्रस्ताव को मिली मंजूरी रही, जिसके तहत ‘ब्रिक्स अर्बन रिसर्च एंड नॉलेज नेटवर्क’ की स्थापना की जाएगी।
क्या है यह नेटवर्क? यह एक वर्चुअल, कम लागत वाला और लचीला मॉडल होगा जो व्यावहारिक शहरी अनुसंधान, ज्ञान साझाकरण और सदस्य देशों के बीच परिचालन संबंधी सीखों के आदान-प्रदान का जरिया बनेगा।
गवर्नेंस: इसका समन्वय हर साल ब्रिक्स की अध्यक्षता करने वाले देश की प्रमुख संस्था करेगी। सभी सदस्य देशों ने भारत की इस अनूठी पहल का स्वागत किया है।
इसके अलावा, मंच पर ‘सिटीज फॉर पीपल: अर्बन स्टोरीज फ्रॉम ब्रिक्स नेशन्स’ शीर्षक से सदस्य देशों की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का एक साझा संकलन भी प्रस्तुत किया गया।
द्विपक्षीय बैठकें और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
शहरी एजेंडे से इतर, इस फोरम के दौरान वैश्विक कूटनीति की भी मजबूत झलक देखने को मिली। भारत-रूस, भारत-ईरान, ईरान-रूस, ईरान-चीन और रूस-संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं।
विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने नई दिल्ली के गौरव नए संसद परिसर और इंडिया गेट-कर्तव्य पथ क्षेत्र का दौरा किया। कार्यक्रम का समापन एक भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति और नेटवर्क डिनर के साथ हुआ। ब्रिक्स शेरपा और विदेश मंत्रालय में विदेश संबंध सचिव श्री सुधाकर दलेला ने सफल आयोजन के लिए शहरी कार्य मंत्रालय की सराहना की।
लाइव 11 न्यूज डेस्क, नई दिल्ली।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
