नई दिल्ली/पोर्ट विक्टोरिया 12 जून, 2026: दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती (Operational Deployment) के तहत, भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत ‘तारकश’ (INS Tarkash) शुक्रवार को सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया पहुंचा। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और सेशेल्स के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आपसी सहयोग और समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत करना है।

🤝 स्थायी समुद्री साझेदारी का अनूठा उदाहरण
इस यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि INS तारकश अपने साथ सेशेल्स तटरक्षक बल (Seychelles Coast Guard) के जहाज ‘पीएस ज़ोरोएस्टर’ (PS Zoroaster) को भारत से वापस सेशेल्स लेकर आया है।
खास बात: ‘पीएस ज़ोरोएस्टर’ का कोलकाता के GRSE (गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स) में बड़े पैमाने पर मरम्मत और रखरखाव (G-Repair) का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। यह कदम दोनों देशों के बीच जहाजों के निर्माण और रखरखाव के क्षेत्र में एक गहरी और स्थायी समुद्री साझेदारी को प्रदर्शित करता है।
⚓ यात्रा के मुख्य बिंदु और गतिविधियां
रणनीतिक तालमेल: यह सफल पारगमन हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री चुनौतियों और सुरक्षा खतरों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल (Interoperability) को रेखांकित करता है।
उच्च स्तरीय बैठकें: यात्रा के दौरान INS तारकश के कमांडिंग ऑफिसर, कैप्टन रोहित मिश्रा, सेशेल्स सरकार के शीर्ष नेतृत्व और सेशेल्स रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर रणनीतिक सहयोग पर चर्चा करेंगे।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान: इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को मधुर बनाने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
रसद और उपकरणों की आपूर्ति: इस यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना द्वारा सेशेल्स सरकार को आवश्यक साजो-सामान और महत्वपूर्ण रक्षा उपकरण सौंपे जाएंगे, जो उनकी तटीय सुरक्षा को बढ़ाने में मदद करेंगे।
🌐 ‘सागर’ (SAGAR) विजन को बढ़ावा
यह बंदरगाह भ्रमण (Port Visit) भारत सरकार के ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region – SAGAR) विजन के अनुरूप है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में सभी देशों की सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देता है। भारत और सेशेल्स के बीच का यह सौहार्दपूर्ण दौरा दोनों देशों के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ेगा।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
