प्रबंधन एक करोड़ से करा रहा रंगाई-पुताई, मरीज परेशान
बेरमो: बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के एकमात्र अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है. यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों, सर्जनों और चिकित्सा कर्मियों की भारी कमी है, लेकिन प्रबंधन का ध्यान डॉक्टरों की नियुक्ति के बजाय अस्पताल की चकाचैंध बढ़ाने पर है. मरीजों को इलाज के लिए डॉक्टर चाहिए, जबकि प्रबंधन अस्पताल की मरम्मत और रंगाई-पुताई पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में हैl आपको बता दे की वर्तमान में पूरे अस्पताल में एकमात्र विशेषज्ञ के रूप में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता रानी तैनात हैं. उनके अलावा कोई दूसरा विशेषज्ञ या सर्जन मौजूद नहीं है. पहले चंद्रपुरा अस्पताल के सर्जन डॉ. ए के श्रीवास्तव सप्ताह में एक दिन यहां आते थे, लेकिन मेजिया तबादले के बाद यह व्यवस्था भी ठप हो गई. लोगो मे चर्चा है कि नाराज डॉ. श्रीवास्तव ने वीआरएस के लिए आवेदन दिया है, जो अभी लंबित हैl मिली जानकारी के अनुसार कभी पूरी तरह चालू रहने वाला ऑपरेशन थिएटर अब बंद पड़ा है. पहले यहां डॉ. संगीता रानी, नेत्र सर्जन डॉ. आर द्विवेदी और जनरल सर्जन डॉ. ए के श्रीवास्तव नियमित ऑपरेशन करते थे. डेंटल, नेत्र व जनरल सर्जन सहित ओटी नर्स के तबादले के बाद से देख रेख के अभाव में ओटी के सारे महंगे उपकरण खराब होने के कगार पर हैं. डॉ. संगीता रानी पिछले दो वर्षों से यहां कार्यरत हैं, लेकिन ओटी बंद होने से ऑपरेशन नहीं कर पातीं. नतीजतन, डीवीसी कर्मियों सहित ऊपरघाट से आने वाले गंभीर मरीजों को बाहर रेफर कर दिया जाता है l
यूनियन ने उठाए सवाल
डीवीसी मजदूर यूनियन के संयुक्त सचिव जानकी महतो तथा भाकपा के स्थानीय शाखा सचिव रामेश्वर साव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रबंधन को रंग-रोगन से पहले विशेषज्ञों की नियुक्ति और ओटी को आधुनिक उपकरणों से दुरुस्त करना चाहिए था. इससे बोकारो थर्मल और ऊपरघाट की बड़ी आबादी को लाभ मिलता. उन्होंने आरोप लगाया कि सीएसआर के तहत डॉ. संगीता रानी को ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जिससे अस्पताल आने वाले मरीज घंटों इंतजार करते हैं. उन्होंने डीवीसी के नए चेयरमैन और मेंबर सेक्रेटरी से विशेषज्ञ डॉक्टरों की पदस्थापना, ओटी बहाली और सालों से बंद अल्ट्रासाउंड मशीन चालू कराने की मांग की है.
HOP सुशील कुमार अरजरिया ने दी सफाई
इस संबंध में डीवीसी के परियोजना प्रधान सुशील कुमार अरजरिया ने कहा कि डॉक्टरों और मैनपावर की कमी को लेकर कई बार मुख्यालय को अवगत कराया जा चुका है. मुख्यालय स्तर पर ही चिकित्सकों की कमी के कारण यहां पोस्टिंग नहीं हो पा रही है. उन्होंने आश्वासन दिया कि नई बहाली होते ही यहां डॉक्टरों की नियुक्ति होगी. एक करोड़ के खर्च पर उन्होंने तर्क दिया कि अस्पताल का भवन काफी जर्जर और बदहाल स्थिति में था, इसलिए मरीजों की सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से रेनोवेशन जरूरी था, वही उन्होंने कहा की बोकारो थर्मल की स्थिति की बात करे तो हॉस्पिटल से लेकर स्कूल, कम्युनिटी सेंटर, बोकारो क्लब और भी जगह है जो पूरी तरह से जर्जर हो चूका है धीरे धीरे सभी जगह काम चल रहा है l
राजेश सागर की रिपोर्ट,
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
