कोडरमा: रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य जाने वाले झारखंड प्रदेश के प्रवासी मजदूरों की मौत होने का सिलसिला नहीं थम रहा हैं। दिनांक 08/08/2024 को कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम+पोस्ट डंडाडीह निवासी श्याम साव के 19 वर्षीय पुत्र सोनू कुमार की कांदिवली में मौत हो गया। जानकारी के अनुसार सोनू कुमार का तबीयत अचानक बिगड़ गया था। बेहतर इलाज के लिए उन्हें हॉस्पिटल कांदिवली में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही गांव में मातम छा गया एवं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार सोनू कुमार कुछ दिन पहले ही रोजगार की तलाश में मुंबई के कांदिवली गए थे। मुंबई में सोनू कुमार दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था और अपने परिवार का भरण पोषण करता था। वहीं इस घटना की सूचना मृतक के परिजनों ने 19 वर्षों से प्रवासी मजदूरों के हितार्थ में कार्य करने वाली संस्था झारखंडी एकता संघ वर्ली इकाई के अध्यक्ष उमेश कुमार यादव को दिए। और शव को गांव ले जाने में मदद की अपील किए।
संघ के पदाधिकारीयों ने मृतक के परिवार वालों को ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। झारखंडी एकता संघ बोरीवली एवं वर्ली इकाई के सक्रिय सदस्य सीताराम साव, बीरबल साव, कमल साव, संतोष साव, जुगल साव, कन्हैया साव आदि हॉस्पिटल कांदिवली पहुंचे और पार्थिव शरीर को गांव भेजने में आर्थिक सहयोग के साथ काफी मदद किए। मौत को लेकर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष फिरोज आलम, उपाध्यक्ष सलीम अंसारी, सदरुल शेख़, विनोद प्रसाद, ताज हसन अंसारी, संतोष कुमार, असगर खान, तौफीक अंसारी, प्रकाश यादव, राजेंद्र शर्मा, रवि कुमार, मुस्तकीम अंसारी और मुन्ना प्रसाद आदि ने दुःख प्रकट करते हुए कहा, कि झारखंड के प्रवासी मजदूरों का मौत के मुंह में समा जाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई प्रवासी मजदूरों की मौतें देश एवं विदेशों में हो चुकी है। प्रवासी मजदूरों के साथ किसी तरह का हादसा एवं किसी तरह का समस्या आ जाती है तो झारखंड प्रदेश के विधायक, सांसद व मंत्री प्रवासी मजदूरों को किसी तरह का कोई मदद नहीं करते हैं। मदद के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। झारखंड सरकार प्रवासी मजदूरों के हित में कुछ भी पहल नहीं कर पा रही है। झारखंड प्रदेश खनिज संपदा से मालामाल होने के बावजूद आज झारखंड प्रदेश के मजदूरों का पलायन लगातार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। संस्था झारखंडी एकता संघ अब तक लगभग 271 प्रवासी मजदूरों का शव गांव झारखंड भेज चुकी है। संघ 19 वर्षो से सरकार से प्रवासी कल्याण आयोग के गठन की मांग कर रही है। जिससे प्रदेश के बाहर रोजगार के लिए गए प्रवासी मजदूरों का सुरक्षा एवं सहायता मिल सके। इस पर भी पूर्व सरकारों की तरह वर्तमान सरकार भी कुछ नहीं सोच रही है जो हम झारखंडियों के लिए दुर्भाग्य की विषय है।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
