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राजभाषा अकादमी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित 17वां हिंदी सम्मेलन में सीसीएल, रांची सम्मानित।

पुरी, ओडिशा: राजभाषा अकादमी, नई दिल्ली द्वारा 29 अगस्त से 31 अगस्त 2024 तक होटल श्री हरी, पुरी में 17वां हिंदी सम्मेलन और प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में विभिन्न संगठनों से आए राजभाषा अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जहां उन्होंने राजभाषा अधिनियम और इसके आधिकारिक कार्यों में उपयोग पर गहन चर्चा की।

 

इस कार्यक्रम में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) ने अपने दो अधिकारियों को नामित किया था: चंदन कुमार, उप प्रबंधक (समुदाय विकास), कथारा, और रवि रंजन, प्रबंधक (औद्योगिक अभियांत्रिकी), सीसीएल मुख्यालय, रांची। दोनों अधिकारियों ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की और विभिन्न सत्रों में अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान, राजभाषा के महत्व और इसके तकनीकी उपयोग से संबंधित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। साथ ही, आधिकारिक कार्यों में हिंदी के व्यापक और प्रभावी उपयोग के लिए नए तरीके और सुझाव प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में राजभाषा के उपयोग को बढ़ाने के लिए तकनीकी समाधानों और उपकरणों पर विशेष ध्यान दिया गया।

 

समापन समारोह के दौरान, सीसीएल को राजभाषा सम्मान शील्ड से सम्मानित किया गया। यह शील्ड सीसीएल द्वारा राजभाषा के तकनीकी उपयोग और उसके प्रचार-प्रसार में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान की गई। सीसीएल के प्रतिनिधियों, चंदन कुमार और रवि रंजन ने इस सम्मान को प्राप्त किया।

इस अवसर पर चंदन कुमार ने कहा की “राजभाषा हिंदी न केवल हमारे देश की पहचान है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न हिस्सा भी है। हमें गर्व है कि हम राजभाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। आधिकारिक कार्यों में हिंदी के प्रभावी उपयोग के लिए यह सम्मान हमें और भी प्रेरित करता है। वही कुमार ने यह भी कहा कि राजभाषा के उपयोग से न केवल हमारे कार्य आसान होते हैं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी मजबूत करता है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक उपयोग की अपील की, ताकि देश के कोने-कोने में हिंदी का प्रचार हो सके।

 

राजभाषा अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने हिंदी के महत्व और इसके उपयोग को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीसीएल को मिला यह सम्मान न केवल उनके प्रयासों की सराहना है, बल्कि यह उनके समर्पण और मेहनत का प्रमाण भी है।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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