जमीन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जमीन माफिया कमलेश कुमार सिंह, कांके सीओ जयकुमार राम और पूर्व सीओ दिवाकर द्विवेदी सहित छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट मंगलवार को पीएमएलए के विशेष कोर्ट में दायर की गई है। इनमें तीन आरोपी सीओ के करीबी हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इन तीनों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था। इनमें से सिर्फ कमलेश को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। अन्य आरोपियों पर कोर्ट के निर्देश के बाद कार्रवाई होगी।
चार्जशीट में कहा गया है कि सीओ जयकुमार राम के सहयोग से आदिवासी-भुईहरी और सरकारी जमीन का नेचर बदला गया। पंजी टू के ऑनलाइन रेकर्ड में छेड़छाड़ की गई। ऐसी जमीन का म्यूटेशन किया गया, जो प्रतिबंधित सूची की थी। इससे वह जमीन गैर आदिवासी प्रकृति की हो गई। इसके बदले सीओ ने एजेंट के माध्यम से मोटी रकम वसूल की। फिर कमलेश ने इस जमीन को बेचकर करोड़ों रुपए की कमाई की।
ईडी ने कहा है कि कांके के पूर्व सीओ दिवाकर द्विवेदी की भूमिका की भी जांच की गई है। कमलेश से उसकी मिलीभगत की पुष्टि हुई है। वह भी फर्जीवाड़े के दोषी पाए गए हैं। तीन अन्य लोग बतौर एजेंट सीओ के लिए काम करते थे। वे वसूली की रकम अपने बैंक खाते में मंगवाते थे और अफसरों में बंटता था।
कांके में बड़े पैमाने पर हुई जमीन की हेराफेरी
चार्जशीट में कहा गया है कि फर्जी दस्तावेज पर आदिवासी, प्रतिबंधित सूची और सरकारी जमीन को जनरल बनाकर बेचने व कब्जा करने के मामले में कमलेश को 26 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। वह अभी जेल में है। इस दौरान सीओ जयकुमार का भी बयान लिया गया। दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। इसमें कई तथ्य उजागर हुए। कांके में बड़े पैमाने पर जमीन की हेराफेरी की पुष्टि हुई। पुलिस हाउसिंग सोसाइटी के पास और लॉ यूनिवर्सिटी के पीछे सरकार द्वारा अधिग्रहीत जमीन को भी बेचने की तैयारी थी।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
