Home » News Update » सुरज कुमार यादव का मुंबई में मौत झारखंडी एकता संघ के सहयोग से शव गांव भेजा गया।

सुरज कुमार यादव का मुंबई में मौत झारखंडी एकता संघ के सहयोग से शव गांव भेजा गया।

हजारीबाग: रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य जाने वाले झारखंड प्रदेश के प्रवासी मजदूरों का मौत होने का सिलसिला नहीं थम रहा है। बरकट्ठा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम किमनियां पंचायत गंगपाचो निवासी स्व नारायण यादव के 19 वर्षीय पुत्र सूरज कुमार यादव का दिनांक 14/12/2024 वर्ली में मौत हो गया था। बताते चलें कि सूरज कुमार यादव वर्ली में होटल में काम करता था। मसाला पिसते समय ग्राइंडर मशीन में उनका हाथ फंस जाने से उनकी घटनास्थल पर ही 8:30 बजे मृत्यु हो गया मृत्यु हो गया। मृत्यु का खबर परिवार वालों को मिलते ही पूरे परिवार में चिकपुकार एवं गांव में मातम छा गया और परिजनों को रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं गांव के किमनियां निवासी सुदामा चौधरी ने प्रवासी मजदूरों के हितार्थ कार्य करने वाली संस्था झारखंडी एकता संघ के राष्ट्रीय सचिव विनोद प्रसाद को सुचना दिया और शव को गांव भेजने में मदद करने का अपील किया। सूचना मिलते ही संघ के राष्ट्रीय सचिव विनोद प्रसाद तत्काल झारखंडी एकता संघ के सदस्यों के साथ केईएम अस्पताल पर पहुंचे और परिवार एवं गांव वालों को ढांढस बंधाया और हर संभव मदद करने का भरोसा दिया एकागज़ी प्रतिक्रया कराकर और लोगों से चंदा इकट्ठा कर शव को हवाई जहाज द्वारा झारखंड भेजा गया इस प्रकरण में गांव वालों सहित संघ के सक्रिय सदस्यों कैलाश यादव, होरील मंडल, अजय सिंह, लक्ष्मण यादव, मनी यादव, प्रकाश मंडल एवं कैलाश मंडल आदि सैकड़ों लोग द्वारा आर्थिक सहयोग किया गया। मौत को लेकर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष फिरोज आलम, उपाध्यक्ष सलीम अंसारी, सदरुल शेख़, विनोद प्रसाद, ताज हसन अंसारी, संतोष कुमार, असगर खान, तौफीक अंसारी, प्रकाश यादव, राजेंद्र शर्मा, रवि कुमार, मुस्तकीम अंसारी और मुन्ना प्रसाद आदि ने दुःख प्रकट करते हुए कहा, कि झारखंड के प्रवासी मजदूरों का मौत के मुंह में समा जाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई प्रवासी मजदूरों की मौतें देश एवं विदेशों में हो चुकी है। प्रवासी मजदूरों के साथ किसी तरह का हादसा एवं किसी तरह का समस्या आ जाती है तो झारखंड प्रदेश के विधायक, सांसद व मंत्री प्रवासी मजदूरों को किसी तरह का कोई मदद नहीं करते हैं। मदद के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। झारखंड सरकार प्रवासी मजदूरों के हित में कुछ भी पहल नहीं कर पा रही है। झारखंड प्रदेश खनिज संपदा से मालामाल होने के बावजूद आज झारखंड प्रदेश के मजदूरों का पलायन लगातार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। संस्था झारखंडी एकता संघ अब तक लगभग 274 प्रवासी मजदूरों का शव गांव झारखंड भेज चुकी है। संघ 20 वर्षो से सरकार से प्रवासी कल्याण आयोग के गठन की मांग कर रही है। जिससे प्रदेश के बाहर रोजगार के लिए गए प्रवासी मजदूरों का सुरक्षा एवं सहायता मिल सके। इस पर भी पूर्व सरकारों की तरह वर्तमान सरकार भी कुछ नहीं सोच रही है जो हम झारखंडियों के लिए दुर्भाग्य की विषय है।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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