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बेरमो अनुमंडल स्थित विभिन्न अस्पतालों में आउटसोर्सिंग कर्मियों का पांचवे दिन भी हड़ताल जारी

तेनुघाट — बेरमो अनुमंडल स्थित विभिन्न अस्पतालों में आउटसोर्सिंग कर्मियों का पांचवे दिन भी हड़ताल जारी रहा। वहीं अनुमडलीय अस्पताल तेनुघाट, गोमिया समुदायिक स्वास्थ केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पेटरवार में कार्यरत आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शनिवार को लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। आठ माह से वेतन न मिलने से आक्रोशित कर्मियों ने अस्पताल परिसर में धरना प्रदर्शन किया, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। आउटसोर्स कर्मियों का कहना है कि वे दिन-रात अस्पताल में अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन आठ महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। होली जैसे बड़े पर्व पर भी वेतन न मिलने से नाराज कर्मियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द भुगतान की मांग की है। अंजू देवी ने कहा कि जब से मैं काम कर रही हूं तब से वेतन नहीं मिला है। मेरे दो बच्चे हैं कैसे अपने बच्चों की परवरिश करूं। कर्मियों ने बताया कि गिरिडीह जिले में आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों को 18,000 रुपए से 20,000 रुपए तक मानदेय दिया जाता है, जबकि बोकारो जिले में उन्हें केवल 7,000, 8,000 या अधिकतम 13,000 ही मिलता है। कर्मियों ने सवाल उठाया कि जब गिरिडीह और बोकारो दोनों झारखंड राज्य के ही जिले हैं, तो समान कार्य के लिए अलग-अलग वेतन क्यों दिया जा रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पूरा मानदेय नहीं दिया जाता, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनके वेतन का भुगतान शीघ्र किया जाए ताकि वे अपनी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रख सकें शनिवार को हड़ताल पर बैठे स्वास्थ्य कर्मियों का समर्थन पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांग पूरी तरह जायज है और उन्होंने सिविल सर्जन बोकारो एवं राइडर सिक्योरिटी सर्विस से बातचीत कर जल्द से जल्द वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही है। इस दौरान राइडर कंपनी ने लिखित में दिसंबर 2024 का मानदेय 25 मार्च तक उनके खाते में करने का आश्वासन दिया। डॉ लंबोदर महतो ने सिविल सर्जन बोकारो के समक्ष गिरिडीह एवं बोकारो के आउटसोर्स कर्मियों के बीच वेतन असमानता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों जिलों में समान काम के बदले वेतन असमानता बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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