तेनुघाट: तेनुघाट, सरहचिया, घरवाटांड और आस-पास के क्षेत्रों में सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और सुखमय जीवन के लिए वट सावित्री व्रत के तहत बरगद के पेड़ की पूजा की। आई टाइप कॉलोनी, छोटा चौक, मार्केट और विभिन्न स्थानों पर बरगद के विशाल के वृक्ष के सामने सुहागन महिलाओं का जुटान हुआ। महिलाओं ने 16 श्रृंगार कर पेड़ के चारों ओर परिक्रमा की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रार्थना की। इस बारे में पंडित बलदेव मिश्रा, शशि मिश्रा, राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि भारतीय परंपरा के अनुसार, इस दिन मां सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लिए थे। बरगद वृक्ष की पूजा इस व्रत का विशेष अंग है क्योंकि सावित्री ने अपने पति के प्राण लौटने पर वट वृक्ष का आभार व्यक्त किया था। यह पर्व महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिससे उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस वर्ष वट सावित्री की पूजा दो अलग-अलग दिनों में संपन्न होने के कारण सुहागिनों को काफी परेशानी हुई। एक ही पंचायत में कुछ महिलाएं सोमवार को पूजा करती नजर आईं, जबकि अन्य मंगलवार को पूजा-अर्चना की। इससे क्षेत्र में भ्रम की स्थिति बनी रही। बावजूद इसके, महिलाओं ने भक्ति भाव से अपनी परंपरा का पालन किया। यह स्थिति दर्शाती है कि धार्मिक आयोजन में सामंजस्य और एकरूपता की आवश्यकता है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
