गिरिडीह टाउन हॉल में रविवार को जमीअत उलमा जिला गिरिडीह की ओर से “याद-ए-मुजाहिदीन-ए-आज़ादी कॉन्फ्रेंस” का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में दारुल उलूम देवबंद के प्रतिष्ठित आलिम, शैखुल इस्लाम के नवासे और जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश के सचिव मौलाना सैयद हसन असजद मदनी ने शिरकत की। इस मौके पर मौलाना मदनी ने अपने ओजस्वी संबोधन में देश की आज़ादी में अहम भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने भारत की दो सौ वर्षों की आज़ादी की जद्दोजहद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस देश को हमारे बुजुर्गों और उलेमा ने आज़ाद कराया, लेकिन आज इसी देश में नफ़रत और धर्म के नाम पर लोगों को बांटा जा रहा है। उन्होंने देश के लिए सबसे बड़ा खतरा साम्प्रदायिकता को बताया और कहा कि कुछ लोग अंग्रेजों की “फूट डालो और राज करो” की नीति पर आज भी चल रहे हैं, लेकिन वे कभी सफल नहीं हो सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि गंगा-जमुनी तहज़ीब को बचाना और आगे बढ़ाना हम सभी भारतीयों का कर्तव्य है।मौलाना मदनी ने कहा कि आज देश को आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे की सबसे अधिक आवश्यकता है, क्योंकि इन्हीं मूल्यों के सहारे देश प्रगति कर सकता है। उन्होंने पैग़म्बर-ए-इस्लाम के जीवन से प्रेरणा लेते हुए कहा कि यदि हम उसी मार्ग पर चलें तो सफलता निश्चित है। इस अवसर पर टाउन हॉल में मौलाना मदनी का जोरदार स्वागत किया गया। राज्य के महासचिव मुफ्ती मोहम्मद शहाबुद्दीन क़ासमी, जमीअत उलमा ज़िला गिरिडीह के अध्यक्ष मौलाना अक़रम क़ासमी और ज़िला महासचिव मौलाना मोहम्मद रुस्तम क़ासमी ने उन्हें गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया। इस कार्यक्रम में गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग और जामताड़ा से आए लोगों ने हिस्सा लिया। जिनमें जमीअत उलमा के सदस्य, ज़िम्मेदारान, उलमा और शहर के कई बुद्धिजीवी शामिल थे। 
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
