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अबुआ आवास योजना में भ्रष्टाचार का आरोप

पैसा न देने पर लाभुक को मृत घोषित कर खाता बंद कराया गया – मुखिया पर लगा गम्भीर आरोप

गिरिडीह — सोमवार को एक अबुआ आवास लाभुक मीणा देवी ने बिरनी प्रखण्ड मुख्यालय के समक्ष परिवार सह बकरी समेत धरना डिट। मामला बिरनी प्रखंड के मझलाडीह पंचायत की हैं। वही एक दलित महिला मीना देवी ने पंचायत के मुखिया सत्येंद्र राउत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि अबुआ आवास योजना की दूसरी किस्त देने के लिए मुखिया ने उनसे बीस हजार रुपये की मांग की।

मीना देवी ने बताया कि पहले उन्होंने दस हजार रुपये मुखिया को दे भी दिए, लेकिन शेष राशि न देने पर भुगतान रोक दिया गया। आरोप है कि मुखिया ने प्रखंड कार्यालय से मिली भगत कर उनका बैंक खाता मृत घोषित करवा दिया और खाता भी बंद करा दिया। इसके कारण वे न तो अबुआ आवास योजना की राशि ले पा रही हैं और न ही ‘मइया समान योजना’ का लाभ मिल रहा है।

महिला ने बताया कि वर्ष 2007-08 में उन्हें दीनदयाल आवास की स्वीकृति मिली थी और उस समय 12,500 रुपये का भुगतान भी हुआ था, लेकिन गरीबी के कारण घर पूरा नहीं बन पाया। बाद में वर्ष 2024-25 में अबुआ आवास की स्वीकृति मिली और पहली किस्त के तौर पर 30,000 रुपये का भुगतान भी हुआ, जिससे उन्होंने कर्ज लेकर घर का निर्माण शुरू किया। लेकिन 15 माह पहले तत्कालीन बीडीओ ने दीनदयाल आवास का हवाला देकर शेष भुगतान पर रोक लगा दी।

मीना देवी का कहना है कि बरसात में उनका कच्चा घर गिर गया और अब वे परिवार सहित बेघर हो गई हैं। इसी को लेकर उन्होंने सोमवार से बिरनी प्रखंड मुख्यालय गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। महिला का कहना है कि जब तक खाता चालू नहीं होगा और अबुआ आवास की शेष राशि नहीं मिलेगी, तब तक वे परिवार सहित धरने पर डटी रहेंगी।

इस मामले पर भाकपा माले प्रखंड सचिव सह उपप्रमुख शेखर सुमन ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषी मुखिया एवं पंचायत सचिव पर कड़ी कार्रवाई करते हुए पीड़ित दलित परिवार को न्याय दिलाया जाए, अन्यथा आंदोलन मंगलवार से व्यापक रूप लेगा।

इस बारे में मुखिया सतेंद्र राउत ने बताया कि युक्त महिला द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद है। हम पंचायत में किसी तरह का पैसा किसी से नहीं लिए है। युक्त महिला राजनीतिक षड्यंत्र के तहत मुझ पर झूठा आरोप लगा रही है और फंसा रही है।

Shamsher Editor in chief
Author: Shamsher Editor in chief

14/08/1980

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