सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा में बुधवार को आचार्य की सेवानिवृत्ति पर स्नेह- मिलन समारोह का आयोजन किया गया।प्रधानाचार्य आनंद कमल ने सतीश मिश्रा की सेवानिवृत्ति पर कहा कि वे 32 वर्षों से अपनी कार्य कुशलता और प्रतिभा के आदर्श आचार्य के रूप में विद्यालय में कार्य किया है ।अपनी सादगी, सरलता कर्मठता एवं आध्यात्मिक भाव से सदैव पहचाने जाएंगे। इस अवसर पर विद्यालय परिवार की ओर से पुष्प-गुच्छ ,वस्त्र शाॅल, मिठाई आदि भेंट कर सम्मानित किया गया।समिति उपाध्यक्ष सतीश्वर प्रसाद सिन्हा ने अंगूठी पहनाकर स्वागत किया।डॉ• ब्रजेश बरनवाल ने उनकी याद में प्रशस्ति-पत्र का वाचन किया वहीं सरिता कुमारी एवं नलिन कुमार ने उनके साथ बीते पलों को साझा किया।प्रधानाचार्य ने प्रबंध करनी समिति की ओर से अर्जित अवकाश का भुगतान चेक द्वारा किया।मौके पर सतीश्वर प्रसाद सिन्हा ने कहा कि एक आचार्य कभी सेवा निवृत नहीं होता है। नौकरी पेशा में मिलन एवं विरह का समय निर्धारित है। लेकिन व्यवस्था के कारण सेवा समाप्त होती है।वह हमेशा अपने ज्ञान एवं अनुभव के द्वारा समाज में योगदान करते रहेंगे ऐसी अपेक्षा है। संरक्षक उदय शंकर उपाध्याय ने कहा कि सतीश मिश्रा ने जिस निष्ठापूर्वक और समर्पण भाव से लंबे समय तक बच्चों को शिक्षा प्रदान किया है उसे भुलाया नहीं जा सकता। आचार्य सतीश मिश्रा ने कहा कि विद्यालय की ओर से जो स्नेह, सहयोग और सम्मान प्राप्त हुआ है उसे मैं चंद शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। विद्यालय नित्य नई ऊंचाइयों को स्पर्श करें ऐसी मेरी शुभकामनाएं है।समारोह को सफल बनाने में अजीत मिश्रा, राजेंद्र लाल बरनवाल,शुभेंदु चंदन एवं समस्त आचार्य-दीदी का सराहनीय योगदान रहा।

Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
