झारखंड : रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले झारखंड के प्रवासी मजदूरों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नवादा निवासी स्व. गणेश साव के 46 वर्षीय पुत्र जानकी साव की मुंबई के बोरीवली में सड़क दुर्घटना में इलाज के दौरान मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 24 जनवरी 2026 को बोरीवली क्षेत्र में एक दोपहिया वाहन ने जानकी साव को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल शताब्दी हॉस्पिटल, बोरीवली में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मौत की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया गया कि जानकी साव कुछ दिन पूर्व ही रोजगार की तलाश में मुंबई गए थे। वे बोरीवली में ऑटो रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। जानकी साव अपने पीछे पत्नी कुंती देवी तथा दो पुत्र—महेश कुमार (16 वर्ष) और विवेक कुमार (14 वर्ष)—को छोड़ गए हैं। वे परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे।
घटना की सूचना मिलने पर मृतक के गांव वालों ने प्रवासी मजदूरों के हित में पिछले 21 वर्षों से कार्यरत संगठन झारखंडी एकता संघ से संपर्क किया। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी, बोरीवली इकाई अध्यक्ष भीम कुमार गुप्ता एवं केंद्रीय सदस्य तौफीक अंसारी से शव को गांव भेजने में सहयोग की अपील की गई। संघ के पदाधिकारियों ने परिजनों को ढांढस बंधाया और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
इसके बाद झारखंडी एकता संघ बोरीवली इकाई अध्यक्ष भीम कुमार गुप्ता के नेतृत्व में सक्रिय सदस्य मंटू कुमार मोदी, मोतीलाल कुमार, जसीमुद्दीन अंसारी, सुरेश पंडित, मनोज साव, मंटू साव, मुकेश साव तथा राष्ट्रवादी ऑटो रिक्शा चालक मालिक संघ के उपाध्यक्ष इसाक मुल्ला शताब्दी हॉस्पिटल पहुंचे और पार्थिव शरीर को गांव भेजने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जानकी साव का पार्थिव शरीर आज फ्लाइट के माध्यम से उनके पैतृक गांव नवादा भेजा गया।
इस दुखद घटना पर झारखंडी एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष फिरोज आलम सहित सलीम अंसारी, सदरुल शेख, विनोद प्रसाद, मुन्ना प्रसाद, ताज हसन अंसारी, असगर खान, तौफीक अंसारी, संतोष कुमार, प्रकाश यादव, राजेंद्र शर्मा, रवि कुमार एवं मुस्तकीम अंसारी ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों की मौत की यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी देश-विदेश में काम करने के दौरान कई झारखंडी मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं।
संघ के नेताओं ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार प्रवासी मजदूरों के हित में ठोस पहल करने में विफल रही है, जिसके कारण राज्य से मजदूरों का पलायन लगातार बढ़ रहा है। झारखंडी एकता संघ अब तक लगभग 300 प्रवासी मजदूरों के शव उनके पैतृक गांव झारखंड भिजवाने में सहयोग कर चुका है। संगठन बीते 21 वर्षों से प्रवासी कल्याण आयोग के गठन की मांग कर रहा है, लेकिन पूर्व सरकारों की तरह वर्तमान सरकार भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जो झारखंडी जनमानस के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
Author: Shamsher Editor in chief
14/08/1980
