बेरमो: सीसीएल स्वांग-गोविंदपुर प्रबंधन के अधीन बोकारो थर्मल स्थित गोविंदपुर एफ पंचायत के लहरियाटांड़ गांव के समीप कोनार नदी किनारे निर्माणाधीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में काम कर रहे मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. मजदूरों का आरोप है कि न्यूनतम मजदूरी और श्रम अधिकारों की मांग उठाने के बाद 19 सितंबर से निर्माण कार्य अचानक बंद कर दिया गया और सभी मजदूरों को काम से बैठा दिया गया.
न्यूनतम मजदूरी की मांग के बाद काम बंद होने का आरोप
मजदूरों के अनुसार, उन्होंने अपने हक, न्यूनतम मजदूरी के भुगतान और श्रम अधिकारों को लेकर आवाज उठाई थी. इसी बीच इस मामले को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद कंपनी और संवेदक ने सुपरवाइजरों के माध्यम से निर्माण कार्य बंद करने का निर्देश दिया. काम बंद होने के बाद मजदूरों का कहना है कि वे रोज सुबह उम्मीद के साथ निर्माण स्थल पर पहुंचते हैं कि शायद काम दोबारा शुरू हो जाएगा, लेकिन उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है.
कम मजदूरी पर काम करने का दबाव बनाने का आरोप
मजदूरों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराने के लिए उन पर कम दर पर काम करने की सहमति देने का दबाव बनाया जा रहा है. मजदूरों के मुताबिक, उन्हें प्रति मजदूर 400 रुपये की कम दर पर काम करने के लिए लिखित या मौखिक सहमति देने को कहा जा रहा है. मजदूरों ने इस शर्त को मानने से इनकार करते हुए कहा कि वे अपने श्रम के उचित भुगतान और अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे. उनका कहना है कि काम बंद होने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है.
सुपरवाइजर ने बताया ऊपर से मिला निर्देश
कार्यस्थल पर मौजूद सुपरवाइजर रोहित कुमार ने कहा कि उन्हें कंपनी और संवेदक की ओर से कार्य बंद करने का निर्देश मिला था. इसी निर्देश के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है. हालांकि, मजदूरों द्वारा लगाए गए कम मजदूरी पर काम कराने के दबाव और अन्य आरोपों पर कंपनी या संवेदक का पक्ष सामने नहीं आया है.
जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो तालाबंदी की चेतावनी
काम बंद होने से परेशान मजदूरों ने मामले में जल्द समाधान की मांग की है. मजदूरों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य शीघ्र शुरू नहीं किया गया और उन्हें काम पर वापस नहीं लिया गया, तो वे निर्माण स्थल पर स्थायी रूप से तालाबंदी करने को मजबूर होंगे. मजदूरों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने और उन्हें निर्धारित मजदूरी एवं श्रम अधिकारों के अनुरूप काम उपलब्ध कराने की मांग की है. मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
राजेश सागर की रिपोर्ट,
