बेरमो: झारखंड के पूर्व मंत्री इंटक के राष्ट्रीय महासचिव सह दिग्गज मजदूर नेता दिवंगत राजेंद्र प्रसाद सिंह की शानिवार को ढोरी स्टाफ क्वाटर में पांचवी पुण्यतिथि मनाई गई।
राजेंद्र प्रसाद सिंह का जीवन परिचय
झारखंड के बोकारो जिले का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र, न केवल अपने कोयला खनन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, बल्कि उन नेताओं के लिए भी, जिन्होंने मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए अपना जीवन समर्पित किया। इनमें से एक प्रमुख नाम है राजेंद्र प्रसाद सिंह, जिन्हें बेरमो की जनता प्यार से “बाबू जी” के नाम से याद करती है। उनकी पुण्यतिथि (24 मई) पर, हम उनके जीवन, योगदान और उनके द्वारा छोड़ी गई अमिट छाप को याद करते हैं।

राजेंद्र प्रसाद सिंह का जन्म झारखंड के बेरमो क्षेत्र में एक साधारण परिवार में हुआ था। मजदूर वर्ग के बीच पले-बढ़े होने के कारण, उन्होंने श्रमिकों की कठिनाइयों और शोषण को नजदीक से देखा। इस अनुभव ने उन्हें मजदूरों के कल्याण और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़कर मजदूर आंदोलनों को नई दिशा दी।
राजेंद्र सिंह ने बेरमो विधानसभा क्षेत्र से रिकॉर्ड छह बार विधायक के रूप में सेवा की, जो उनके प्रति जनता के अटूट विश्वास को दर्शाता है। उनके निधन के बाद, उनके बड़े पुत्र कुमार जयमंगल सिंह ने उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया और 2019 के उपचुनाव में बेरमो से विधायक चुने गए।
मजदूरों के मसीहा
राजेंद्र प्रसाद सिंह को बेरमो में मजदूरों के मसीहा के रूप में जाना जाता था। कोयला खदानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण आंदोलन चलाए। असुरक्षित कार्यस्थलों, कम वेतन, और शोषण जैसे मुद्दों पर उनकी आवाज हमेशा बुलंद रही। वे भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के एक प्रमुख नेता थे और मजदूरों के हितों के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे।
उनके नेतृत्व में, बेरमो के मजदूरों को बेहतर वेतन, कार्यस्थल पर सुरक्षा, और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिला। उनकी सादगी और जनता के प्रति समर्पण ने उन्हें सभी वर्गों के बीच लोकप्रिय बनाया। जैसा कि एक एक्स पोस्ट में कहा गया, “आप सदैव हृदय में।। अगर आज आप होते तो जातिगत जनगणना में एक नई कॉलम बनाने की जरूरत होती… जिसमें अंकित होता ‘मानवता’।
“राजनीतिक योगदान
राजेंद्र प्रसाद सिंह ने न केवल मजदूरों के लिए, बल्कि बेरमो के समग्र विकास के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में, उन्होंने बेरमो सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। जीत के बाद उन्होंने कहा, “बेरमो की जनता वर्तमान विधायक से तंग थी, इसलिए जनता ने उन्हें बाहर कर दिया।” उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि वे सभी के लिए काम करेंगे, चाहे वह किसी भी दल से हों।वे झारखंड सरकार में पूर्व मंत्री भी रहे और क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया। उनकी नीतियों और कार्यों ने बेरमो को एक मजबूत सामाजिक और आर्थिक आधार प्रदान किया।
पुण्यतिथि: 24 मई, 2020 को राजेंद्र प्रसाद सिंह का निधन हो गया, जिसने पूरे झारखंड और विशेष रूप से बेरमो की जनता को गहरा आघात पहुंचाया। उनकी पुण्यतिथि पर, लोग उन्हें उनकी सादगी, कर्तव्यनिष्ठा, और मजदूर हितों के लिए उनके अथक प्रयासों के लिए याद करते हैं। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निधन को “अपूर्वणीय क्षति” बताया।
उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर, बेरमो में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें लोग उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते हैं और उनके कार्यों को याद करते हैं।
27 मई, 2020 को, उनकी अंतिम विदाई के समय, बेरमो विधायक और उनके पुत्र कुमार जयमंगल सिंह सहित कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सामाजिक प्रभाव और विरासत
राजेंद्र प्रसाद सिंह का जीवन और कार्य आज भी बेरमो की जनता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी मानवता और सामाजिक समावेश की भावना ने उन्हें सभी वर्गों के बीच लोकप्रिय बनाया। एक एक्स पोस्ट में उनकी इस विशेषता को रेखांकित करते हुए कहा गया, “बेरमो साक्ष्य है आप सभी वर्गों में उपलब्ध थे, हर घर, हर आंगन।”उनके निधन के बाद, उनके पुत्र कुमार जयमंगल सिंह ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाया और बेरमो के विकास और मजदूर कल्याण के लिए काम कर रहे हैं। राजेंद्र सिंह की पुण्यतिथि न केवल उनके योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि यह भी प्रेरणा देती है कि सामाजिक न्याय और समानता के लिए संघर्ष को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
निष्कर्ष
राजेंद्र प्रसाद सिंह की पुण्यतिथि हमें उनके बलिदान, समर्पण, और मजदूरों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को याद करने का अवसर देती है। वे न केवल एक मजदूर नेता थे, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने मानवता को सर्वोपरि रखा। उनकी सादगी, कर्तव्यनिष्ठा, और जनसेवा की भावना आज भी बेरमो की जनता के दिलों में जीवित है। उनकी पुण्यतिथि पर, हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेते हैं।
मोहम्मद सेराज की रिपोर्ट,
