गिरिडीह: जिला अंतर्गत जमुआ में खाद्य आपूर्ति विभाग के तरफ से घोर अनियमितता और बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा नेता समाजसेवी परमेश्वर यादव ने उपायुक्त रामनिवास यादव से मिलकर अपने बातों को रखा साथ में उन्होंने आवेदन के माध्यम से दोषियों पर कार्रवाई करने का भी निवेदन किया।
श्री यादव ने कहा हमने कल दो पत्र उपायुक्त महोदय को दिया हूं प्रथम पत्र में 6 बिंदुओं के माध्यम से उपायुक्त महोदय को पत्र दिया गया जिसमें गोदाम से संबंधित मामला उनके तरफ से कहा गया की गोदाम मे भंडारण ना करते हुए डीलरों के पास सीधा अनाज भेज दिया जाता है। वही गोदाम प्रबंधन में अनियमितता की भी शिकायत उपायुक्त महोदय से की गई है। वंही वजन गड़बड़ी और छेड़छाड़ की भी बात कही गई है। जिसके कारण डीलरों के पास अनाज कम पहुंचता है। वहीं वर्तमान में प्रखंड में जनसेवक को आपूर्ति पदाधिकारी और गोदाम प्रबंधक का जिम्मा देने पर सरकार के नियमों का उल्लंघन भी बताया। इस मामले में झारखंड सरकार के कृषि विभाग के विभागीय पत्र का भी जिक्र किया गया है। जिसमें साफ-साफ उल्लेख है कि जन सेवक को कृषि कार्यों के अलावा अन्य कार्यों लगाना अनुचित है तथा वर्तमान में 3 महीने के राशन जून महीने में वितरण न होने के कारण कई गड़बड़ियों को भी उजागर किया है। जिसमें बिना राशन भेजे ही अंगूठा लिए जाने का भी मामला पत्र के माध्यम से दिया गया है।
वहीं दूसरे पत्र में पूर्व में झारखंड यूथ फोर्स के धरने में झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुंदिव्य कुमार सोनू के अध्यक्षता में धरने के खत्म करने के उपरांत आपूर्ति से संबंधित 8 बिंदुओं पर सहमति बनी थी। जिसके ऊपर धरना खत्म हुए करीब 3 महीना हो जाने के बाद भी आज तक किसी भी कार्रवाई की बात सामने निकलकर नहीं आई है। पत्र के माध्यम से यह भी कहा गया है की सहमति के दौरान अनुमंडलीय स्तरीय पदाधिकारी BDO, Co, Sdm, पूर्व विधायक केदार हाजरा, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अलग-अलग राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि एवं नेताओं के भी हस्ताक्षर का भी जिक्र किया गया। उसके बाद भी आज तक किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
उन्होंने मीडिया को दिए गए साक्षात्कार में परमेश्वर यादव ने कहा कि जब दिल्ली से जांच टीम तमाम अनियमिताओं को देखने के लिए जब पहुंचती है तो उस मामले में भी जिला आपूर्ति पदाधिकारी किसी मीडिया को सूचना न देकर चुपचाप गोदाम और खाद आपूर्ति विभाग का जांच अपने स्तर पर करते हुए टीम को वापस दिल्ली रवाना कर देती है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा केंद्रीय टीम को जांच के लिए जमुआ नहीं ले जाने पर भी आपत्ति जताई है एवं उसके लिए किसी प्रकार की कोई ना प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाती है ना ही प्रेस ब्रीफिंग की गई। कुल मिलाकर उन्होंने पीडीएस के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं। अब देखना यह होगा कि कहां तक सिस्टम या संबंधित पदाधिकारी ध्यान देता है और क्या कार्रवाई करता है।
