चतरा:अवैध अफीम की खेती को जड़ से समाप्त करने और चतरा जिले को नशामुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा 3 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2025 तक विशेष “पूर्व खेती अभियान” चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिले के विभिन्न प्रखंडों में जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों को अवैध अफीम की खेती के कानूनी और सामाजिक दुष्परिणामों से अवगत कराया जा रहा है।
उपायुक्त कीर्तिश्री जी के निर्देश पर और जिला जनसंपर्क पदाधिकारी शकील अहमद के नेतृत्व में यह अभियान चरणबद्ध तरीके से संचालित हो रहा है। नुक्कड़ नाटक, गीत-नाट्य, पंपलेट, बैनर और जनसंवाद के जरिए ग्रामीणों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट सहित अन्य कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अफीम की अवैध खेती गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर कार्रवाई, गिरफ्तारी और सजा का प्रावधान है।
**प्रमुख गतिविधियां और प्रभावित क्षेत्र**
8 अक्टूबर से शुरू हुए नुक्कड़ नाटक और गीत-नाट्य कार्यक्रमों ने कुन्दा, गिद्धौर और कान्हाचट्टी प्रखंडों में व्यापक प्रभाव डाला। कुन्दा के ककहिया, कुसुम्हा, सरजामातु और लपूगढ़ा गांवों, गिद्धौर के मंझगावा, सलगा, पहरा और बारीयातु पंचायतों, और कान्हाचट्टी के पथेल, केन्दुआ सहोर, डुमरिया और कोटाप गांवों में ग्रामीणों की भारी भागीदारी देखी गई।
9 अक्टूबर से प्रतापपुर प्रखंड के महकमपुर और योगिडीह गांवों में अभियान शुरू हुआ, जहां ग्रामीणों को वैकल्पिक खेती के विकल्पों की भी जानकारी दी गई। 10 से 14 अक्टूबर तक चंद्रीगोविन्दपुर, घोड़दौड़, सिजुआ और मोनिया पंचायतों में कार्यक्रम आयोजित होंगे। लावालौंग प्रखंड में सिलदाग, मंधनिया, कोलकोले और रिमी पंचायतों में भी अभियान जोरों पर है।
**सांस्कृतिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी**
इस अभियान में प्रतिबिम्ब सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, जन चेतना सांस्कृतिक मंच, सेवा कठपुतली नाट्य ग्रुप, लोक सेवा कला संगम और ज्ञान ज्योति सांस्कृतिक मंच जैसी संस्थाएं नुक्कड़ नाटक और गीत-नाट्य के माध्यम से ग्रामीणों तक संदेश पहुंचा रही हैं। ये कार्यक्रम न केवल चेतावनी दे रहे हैं, बल्कि समाज को नशे से मुक्त करने की प्रेरणा भी दे रहे हैं।
**प्रशासन का संदेश**
उपायुक्त ने कही, “हमारा उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि समाज को नशे की बुराई से मुक्त कर स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण बनाना है।” ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अवैध खेती से दूर रहें और ऐसी गतिविधियों की सूचना प्रशासन को दें।
