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DGP के आदेश की अनदेखी कर बाप-बेटी को भेजा जेल, नामकुम थानेदार और आईओ सस्पेंड

  • जांच पूरी होने तक कोई एक्शन नहीं लेने का था आदेश, बावजूद इसके पुलिस ने भेजा जेल
  • पुलिस अधिकारी डीके सिंह पर भी परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने का आरोप
  • डीजीपी ने डीआईजी (बजट) को सौंपी थी पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी, रांची के तत्कालीन एसएसपी को भी दिया गया था निर्देश

रांची : झारखंड की राजधानी रांची में डीजीपी के आदेश की अनदेखी कर ठगी के एक मामले में नामकुम थाना की पुलिस ने बाप और बेटी को जेल भेज दिया था। महिला खुशी तिवारी और उसके पिता बसंत तिवारी को जेल भेजे जाने के मामले में डीजीपी ने नामकुम थाना प्रभारी मनोज कुमार और मिथुन कुमार को सस्पेंड कर दिया है।

वहीं डीएसपी-01 अमर कुमार पांडेय को शोकॉज किया है। डीएसपी को शोकॉज इसलिए किया गया हैं, क्योंकि उन्होंने सुपरविजन रिपोर्ट तैयार कर गिरफ्तारी का निर्देश दिया था। दरअसल, नामकुम थाना में दर्ज केस को लेकर पूर्व में गोंदा थाना क्षेत्र की रहने वाली ख़ुशी तिवारी ने डीजीपी से लिखित शिकायत की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी अनुराग गुप्ता ने बीते सात अगस्त में इस प्रकरण पर संज्ञान लिया था। डीजीपी ने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी डीआईजी (बजट) संध्या रानी मेहता को सौंपी थी। जांच पुरु होने तक कोई कार्रवाई नहीं करने की हिदायत ही गई थी। इसके बावजूद नामकुम थाना की पुलिस ने खुशी तिवारी और उनके पिता को जेल भेज दिया। डीजीपी ने इसे आदेश की अवहेलना माना।

फर्जी शादीनामा तैयार करने और अश्लील तस्वीरें बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप

खुशी तिवारी ने बताया था कि पति से अलग होने के बाद आर्थिक तंगी के चलते कुछ लोगों से ब्याज पर रकम ली थी। आरोप है कि प्रियंका नायक और उसके भाई काशीनाथ नायक ने पैसे लौटाने के नाम पर उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। महिला के अनुसार, काशीनाथ ने उस पर शादी का दबाव बनाया, फर्जी शादीनामा तैयार कराया और उसकी अश्लील तस्वीरें बनाकर ब्लैकमेल करने लगा। इस संबंध में खुशी ने गोंदा थाना में मामला दर्ज कराया, जिसके बाद काशीनाथ की गिरफ्तारी हुई।

महिला के परिवार के खिलाफ दर्ज कराया फर्जी केस

जेल से छूटने के बाद भी आरोपी ने धमकी जारी रखी और अपनी पत्नी के साथ मिलकर नामकुम थाना में खुशी और उनके परिवार के खिलाफ झूठा मामला दर्ज करा दिया। महिला का आरोप है कि काशीनाथ एक जमीन दलाल है, जिसकी स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मिलीभगत है। बताया गया था कि काशीनाथ डरा-धमका कर महिला द्वारा दर्ज कराए केस को समाप्त करना चाहता है। उन्होंने पुलिस अधिकारी डीके सिंह पर भी परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

आरोपी पर हत्या, लूट, डकैती जैसे कई कांड दर्ज

डीजीपी ने शिकायत के आधार पर जांच में पाया था कि काशीनाथ के खिलाफ रांची के चुटिया, सोनाहातू, धुर्वा, नामकुम और एसटी-एससी थाना में कई मामला दर्ज है। वह एक शातिर अपराधी है। उस पर हत्या, लूट, डकैती जैसे कई कांड दर्ज हैं। इसके बाद डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस मामले में रांची के तत्कालीन एसएसपी को निर्देश दिया था कि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई न हो।

नामकुम थाना प्रभारी को भी आदेश दिया गया था कि वे बिना डीआईजी के आदेश के खुशी तिवारी के घर न जाएं। इसके बावजूद निर्देश का उल्लंघन करते हुए पुलिस ने खुशी और उनके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच रिपोर्ट में इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया, जिसके बाद डीजीपी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थानेदार का तबादला और आईओ को निलंबित कर दिया।

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