राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के अवसर पर दिनांक 9/11/25 को जिले भर के विभिन्न प्रखंडों, पंचायतों, कानूनी सहायता केंद्रों और शिक्षण संस्थानों में पारा लीगल वालंटियरों द्वारा कानूनी जागरूकता सह साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया इसी क्रम में के के वर्मा इवनिंग कॉलेज में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें पैनल अधिवक्ता सह प्राचार्य किशोर कुमार वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण प्राधिकरण का गठन 9 नवंबर 1987 को किया गया। जिसके आधार पर जरूरतमंदों को निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करना राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार का मुख्य उद्देश्य है। निशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 39 ए के तहत एक मौलिक अधिकार है। जो यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। इस अधिकार के तहत जरूरतमंद लोगों को निशुल्क कानूनी सलाह और अदालत कार्रवाई में निशुल्क न्याय प्राप्त कर सकते हैं। जिन्हें निशुल्क कानूनी सहायता मिल सकती है वह अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य, महिलाएं, बच्चे, मानसिक रूप से बीमार या विकलांग व्यक्ति, मानव तस्करी के शिकार, सामूहिक आपदा, जातीय हिंसा, बाढ़, अकाल आदि के शिकार व्यक्ति या जिनकी वार्षिक आय 3,00,000 से कम हो उन्हें निशुल्क विधिक सहायता दिया जा सकता है। वैसे जरूरतमंद व्यक्ति को जिला विधिक सेवा प्राधिकार में एक आवेदन देना होगा उसके बाद उसे निशुल्क विधिक सहायता मिल जाएगा और यदि कोर्ट फीस की आवश्यकता है तो वो भी दिया जाएगा।
इस कार्यक्रम में नामांकन प्रभारी पंकज कुमार वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए ।कार्यक्रम का संचालन फ्रंट कार्यालय पी एलबी दिलीप कुमार ने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पीएलबी अशोक कुमार वर्मा, सुनील कुमार, संतोष कुमार कॉलेज के रोहित महतो, दिगंबर कांत सहाय, सुजीत राय, मोहन चौधरी, आरती कुमारी, रवि प्रकाश, मूरत महतो, संतोष पांडेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही पूरे जिले में विभिन्न विधिक जागरूकता कार्यक्रमों को सफल बनाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गिरिडीह के पारा लीगल वालंटियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।
